वन भूमि के पट्टे के नियमों में दी जा सकती है ढील
त्रिपुरा के वन मंत्री जितेंद्र चौधरी ने आईएएनएस को बताया, "हाल में राज्य के दौरे पर आए केंद्रीय जनजाति कल्याण राज्य मंत्री तुषाराभाई चौधरी ने सालों से जंगलों में रह रहे जनजातियों और गैर जनजातियों को जमीन का पट्टा देने के लिए मौजूदा 75 वर्ष पुराने नियमों में बदलाव के मकसद से अधिनियम में संशोधन का आश्वासन दिया है।"
31 दिसंबर, 2007 से प्रभावी अनुसूचित जनजाति एवं पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की पहचान) अधिनियम, 2005 के अनुसार, "जो जनजाति शुरुआत से जंगल में रह रहे हैं और जो अपनी आजीविका के लिए जंगल या जंगल की भूमि पर निर्भर हैं और जंगल में 75 साल से रह रहे हैं, वे जंगली भूमि का पट्टा पाने के योग्य हैं।"
राज्य सरकार ने पट्टे के लिए मौजूदा निर्धारित 75 वर्ष की अवधि को घटाने के साथ ही गैर जनजातियों को भी जंगल की भूमि का पट्टा देने की मांग की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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