जरदारी ने आतंकवाद के लिए फिर सरकार से इतर ताकतों को दोषी ठहराया
न्यूयार्क में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से आगामी मुलाकात के दौरान होने वाली चर्चा का संकेत देते हुए जरदारी ने भारत के साथ कश्मीर विवाद के हल में सार्थक प्रगति का भी आवाह्न् किया।
लंदन में शुक्रवार को इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेटेजिक स्टडीज में जरदारी ने श्रोताओं से कहा, "आतंकवादी हमलों का निशाना हमेशा लोकतंत्र रहे हैं। उनका निशाना भारत से आरंभ की गई हमारी शांति प्रक्रिया भी रही है। संघर्ष को हवा देने में सरकार से इतर ताकतों और तानाशाही के समर्थकों के निहित स्वार्थ हैं। वे नहीं चाहते कि पाकिस्तान में जमीनी स्तर पर बदलाव आए।"
उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस बात को ध्यान में रखना चाहिए। आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में लोकतांत्रिक सरकार का समर्थन करने की आवश्यकता है।
जरदारी ने अगले चार वर्षो के लिए पाकिस्तान को दी गई 1.1 अरब डॉलर की ब्रिटिश सहायता की प्रशंसा की। परंतु उन्होंने कहा कि आतंकवाद से लड़ने, कट्टरपंथी इस्लामी मदरसों का विकल्प स्थापित करने और अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए पाकिस्तान को 100 अरब डॉलर की आवश्यकता है।
जरदारी ने स्वीकार किया कि दुनिया के पास धन नहीं है लेकिन इसके बावजूद वह न्यूयार्क में ओबामा पर आपात कोष के लिए दबाव डालेंगे।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने भारत और अफगानिस्तान के साथ सहयोगात्मक संबंध बनाने के लिए एक नीति को अपनाया है।
उन्होंने मुंबई हमले के बाद स्थगित समग्र वार्ता को फिर आरंभ करने पर जोर देते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में स्थाई शांति के लिए कश्मीर विवाद का हल आवश्यक है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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