द्वितीय हरित क्रांति में तकनीकी वस्त्र प्रयोग सहायक होगा

मेनन ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य स्तम्भ है और यहां की 70 प्रतिशत जनसंख्या अपनी जीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। अत: अपने नागरिकों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है। उद्योग और सम्बद्घ कार्यकलापों के लिए मांग के संघर्ष के साथ कृषि कार्यकलापों के लिए भूमि में वृद्घि की कम संभावना है लेकिन कृषि उत्पादन बढ़ाने और पिछली फसल संबंधी नुकसान की भरपाई करने की महती आवश्यकता है। कृषि तकनीक इसमें एक अहम भूमिका निभाएगी और हमें आशा है कि एग्रोटेक के विवेकपूर्ण प्रयोग से अगले पांच वर्षो में 1700 लाख टन से बढ़कर फल और सब्जियों का उत्पादन दुगुना अर्थात 3400 लाख टन हो जाएगा। इसके साथ ही पिछली फसल के खाद्यान्न के नुकसान को कृषि वस्त्रों के प्रयोग से 7 प्रतिशत से 4 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं।

वस्त्र सचिव ने कहा कि कृषि तकनीक वस्त्रों में बड़ी संभावना है और इसका बाजार वर्ष 2007-08 के 553 करोड़ रुपये से बढ़कर 2012-13 तक 1300 करोड़ रुपये का हो जाने की संभावना है। प्रयोगशाला में अनेक अनुप्रयोगों में इन वस्त्रों के इस्तेमाल की सुविधा के लिए तमाम नियमों में संशोधन की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया ।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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