स्मारक विवाद : उप्र सरकार के जवाब से सर्वोच्च न्यायालय संतुष्ट नहीं (लीड-1)

न्यायाधीश बी.एन. अग्रवाल और न्यायाधीश आफताब आलम की पीठ ने न्यायालय द्वारा 11 सितंबर को जारी नोटिस के जवाब में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता द्वारा पेश किए गए जवाब को पढ़ने के बाद कहा, "हम आपके शपथपत्र से संतुष्ट नहीं हैं।"

पीठ ने कहा कि यह देखना जरूरी है कि इस प्रकार के स्मारक बनाने के लिए क्या इतना सरकारी धन खर्च किया जा सकता है।

इस पर राज्य सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि विधायी अनुमति मिलने के बाद सरकार स्मारकों पर धन खर्च कर सकती है।

इस पर पीठ ने कहा, "अगर (बजट के) कोष का 80 प्रतिशत इस (स्मारक निर्माण) के लिए इस्तेमाल किया जाता है तो यह न्यायोचित नहीं है।"

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने मायावती सरकार को नोटिस जारी कर पूछा था कि स्मारक स्थलों पर निर्माण रोकने के न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने के लिए क्यों न राज्य सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए।

पीठ ने कहा कि सरकार या विधायिका को भी स्मारकों का निर्माण कराने के लिए सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करने का अधिकार नहीं है।

इससे पहले गुरुवार को दाखिल जवाब में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने इस बात से इंकार किया था कि उनकी सरकार ने राज्य में कांशीराम और अन्य दलित नेताओं के स्मारक स्थलों पर निर्माण कार्य बंद करने संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन किया है।

न्यायालय ने आठ सितंबर को उत्तर प्रदेश सरकार को लखनऊ के सभी स्मारक स्थलों पर निर्माण कार्य बंद करने का आदेश दिया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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