महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने पर शुल्क
मंदिर की प्रबंध समिति की ओर से मिली जानकारी के अनुसार सुबह चार बजे होने वाली भस्म आरती में शामिल होने का विशेष महत्व है और यहां आने वाला हर श्रद्घालु इस आरती में शामिल होना चाहता है। मंदिर परिसर में अधिकतम 500 श्रद्घालुओं के ही खड़े होने की व्यवस्था है।
प्रबंध समिति के प्रशासक शुभकरण शर्मा ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया है कि श्रद्घालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के प्रस्ताव आए हैं, जिनमें कहा गया है कि नंदी हॉल में आकर आरती में शामिल होने वाले 50 श्रद्घालुओं से 501 रुपये का शुल्क लिया जाए। इसके अलावा 450 श्रद्घालुओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। शर्मा के मुताबिक यह अभी केवल एक प्रस्ताव है जिस पर फैसला होना बाकी है।
शर्मा के अनुसार भस्म आरती में शामिल 50 श्रद्घालुओं से शुल्क के रूप में जो राशि प्राप्त होगी, उसका उपयोग श्रद्घालुओं की सुविधा में इजाफा करने में खर्च किया जाएगा। साथ ही गौशाला के विकास में भी इस राशि को लगाया जाएगा। एक अनुमान के मुताबिक इस व्यवस्था के अमल में आने से मंदिर प्रबंध समिति को रोजाना 25 हजार और सालाना 90 लाख रुपये की आय होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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