पिंडदान पर फिल्म बनाएगा कनाडाई दंपति
कनाडा निवासी क्लिफ पिछले पांच दिनों से अपने ससुर कर्नल बी़ पी़ सिंह तथा अपने पूर्वजों का पिंडदान करने के लिए गया में हैं। उनके साथ उनकी पत्नी डॉली, सास प्रेमा और एक मित्र भी हैं। उन्होंने गया की सभी 45 पिंडवेदियों पर पिंडदान किया। यह कर्मकांड पंडा रामनाथ गुर्दा और सोमनाथ गुर्दा ने संपन्न कराया।
क्लिफ का मानना है कि अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान करना धर्म ही नहंीं बल्कि कर्तव्य है। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा में बताया कि भारतीय संस्कृति बड़ी सभ्य एवं अच्छी है। जन्म से लेकर मृत्यु के बाद तक के कर्मकांड यहां के लोग बड़े मनोयोग से करते हैं।
उन्होंने कहा कि वह यहां केवल पिंडदान ही करने नहीं आए हैं बल्कि इस कर्मकांड की फिल्म बनाकर यहां की संस्कृति को कनाडा में प्रदर्शित करेंगे, जिससे श्राद्घ के बारे में वहां के लोगों को जानकारी मिल सके और वे इसकी महता को समझें। उन्होंने कहा कि वे लगातार यहां के श्राद्घकर्म की पद्घति के बारे में जानकारी ले रहे हैं। क्लिफ भारत आते रहते हैं और 40 साल पहले उन्होंने शादी भी भारतीय महिला से ही की थी।
उल्लेखनीय है कि अश्विन महीने के कृष्णपक्ष (पितृपक्ष) में हिन्दू धर्म और संस्कृति में अपने पूर्वजों को पिंडदान करने की परंपरा है, जिसके लिए गया को उत्तम माना गया है। पितृपक्ष में देश-विदेश के लाखों लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति तथा मुक्ति के लिए गया में पिंडदान करने आते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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