जहां मंदिर में मुसलमान नमाज अदा कर खोलते हैं रोजा
चंदौली जिले के नौबतपुर गांव स्थित संकटमोचन मंदिर कई वर्षो से इस अनूठी परंपरा का साक्षी रहा है। इसी गांव में रहने वाले 65 वर्षीय अलख नारायण सिंह ने आईएएनएस से कहा, " हमें इस बात पर गर्व होता है कि हमारे गांव में ऐसा मंदिर है, जो धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का वास्तविक दर्शन कराता है।"
इस अनूठी प्रथा के तहत गांव भर के सारे मुसलमान शाम को संकटमोचन मंदिर परिसर में इकट्ठा होकर रोजा खोलने से पहले की नमाज अदा करते हैं। नमाज अदा करने के बाद वे गांव के ही हिंदुओं द्वारा बनाए गए तरह-तरह के व्यंजनों से अपना रोजा खोलते हैं।
ग्रामीण इंद्रजीत पांडे कहते हैं कि रमजान के पवित्र महीने में रोजेदार मुसलमान भाइयों की सेवा करने में अजीब सी खुशी मिलती है। साथ ही साथ अपरोक्ष रूप से रमजान पर्व से हम भी जुड़ते है, जो ईमानदारी, अहिंसा, धैर्य व आत्मसुधार का संदेश देता है।
मंदिर परिसर में इफ्तार पाíटयां आयोजित करने के लिए स्थानीय लोग चंदा एकत्र करते है। सभी ग्रामीण स्वेच्छा और खुशी से चंदा देते हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक यह किसी को नहीं पता करीब 150 से साल पुराने इस संकट मोचन मंदिर में रमजान के दौरान मुसलमानों द्वारा नमाज अदा करने की परंपरा कब शुरू हुई। नौबत गांव की आबादी करीब 3,000 है, जिसमें मुसलमानों की संख्या 800 है।
कपड़े सिलने का काम करने वाले सज्जाद अख्तर कहते हैं कि हम चाहते हैं कि हिंदू-मुस्लिम की दोस्ती का यह अनोखा संदेश दूर-दूर तक फैले। जहां आज लोग धर्म के नाम पर झगड़ा कर रहे हैं वहीं हमारे गांव में दोनों धर्मो के लोगों के बीच एक खास तरह का जुड़ाव और भाईचारा है। एक अन्य ग्रामीण शफी हैदर कहते हैं कि हमें गर्व होता है कि हमारा गांव देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को जिंदा रखे हुए है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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