मानव अंग प्रतिरोपण कानून में संशोधन को हरी झंडी
कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों और अस्पताल के कर्मचारियों पर कड़ा जुर्माना लगाने की भी मंजूरी दी गई है।
संसद में वर्ष 1994 के दौरान मानव अंग प्रतिरोपण कानून पारित किया गया था और यह 4 फरवरी, 1995 को गोवा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र तथा सभी संघीय क्षेत्रों में लागू हो गया था।
जम्मू एवं कश्मीर और आन्ध्र प्रदेश को छोड़कर सभी राज्यों ने इस कानून को स्वीकार कर लिया था। इन दोनों राज्यों में मानव अंगों के प्रतिरोपण के नियमन संबंधी अपने कानून हैं। इस कानून का मुख्य उद्देश्य चिकित्सीय उद्देश्यों से मानव अंगों को निकालना, भंडारण और प्रत्यारोपण करना है।
मानव अंगों के प्रतिरोपण के इस कानून के बावजूद मीडिया में मानव अंगों के कारोबार के फलने-फूलने और समाज के आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोगों के शोषण की खबरें आ रही थीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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