समलैंगिक यौन संबंधों पर राय जाहिर करने से सरकार ने किनारा किया (लीड-1)
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने पत्रकारों से कहा, "मंत्रिमंडल ने इस विषय पर मंत्री समूूह की रिपोर्ट पर विचार किया और फैसला किया कि अटॉर्नी जनरल से कहा जाएगा कि वह दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कोई राय बनाने में हर संभव सहयोग करें।"
दिल्ली उच्च न्यायालय के दो जुलाई के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पिछले माह की 17 तारीख को सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से आपसी सहमति से दो समलैंगिक व्यस्कों के बीच यौन संबंध के बारे केंद्र सरकार से अपना पक्ष रखने को कहा था।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसले में प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के उस कथन पर जोर दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि संविधान सभी नागरिकों को बराबर के अधिकार की गारंटी देता है।
सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के फैसले को स्थगित करने से इनकार कर दिया था। दरअसल, अटॉर्नी जनरल गुलाम ई. वाहनवती ने संकेत दिया था कि सरकार फैसले पर रोक लगाने के लिए बहुत जोर नहीं दे रही है।
मंत्रिमंडल के इस फैसले को लेकर सोनी को पत्रकारों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। जब उनसे पूछा गया क्या कि सरकार एक विभाजनकारी मुद्दे पर सुरक्षित रास्ता अपना रही है तो उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि आपको इस पर ऐसा दृष्टिकोण रखना चाहिए।"
उन्होंने मंत्री समूह की बैठक के आधार पर तैयार कैबिनेट नोट के बारे में जवाब देने से इनकार कर दिया जिसमें कहा गया है कि उच्च न्यायालय के फैसले में कोई 'कानूनी गलती' गलती नहीं है।
उन्होंने कहा, "मंत्री समूह की रिपोर्ट को कैबिनेट तक ही सीमित कर दिया गया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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