लेप्रोस्कोपी के क्षेत्र में विशिष्ट पहल, अब एक ही सुराख से शल्यक्रिया

उत्तर भारत में यह अपने किस्म की पहली और देशभर में तीसरी सर्जरी है। आर्टेमिस हेल्थ इंस्टीट्यूट अस्पताल के शल्य चिकित्सकों ने गॉल ब्लैडर स्टोन यानी पित्त की थैली की पथरी से पीड़ित 70 वर्षीया ऊषा गुप्ता की यह सर्जरी महज एक ही सुराख से सफलतापूर्वक संपन्न की।

अस्पताल के मिनिमल इंवेसिव सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉक्टर दीप गोयल के नेृतत्व में चार सदस्यीय चिकित्सक दल ने मरीज का गॉल ब्लैडर निकालने के लिए उसके शरीर में चार की जगह एक ही सुराख किया। गोयल के अनुसार 40 मिनट तक चली इस सर्जरी में विशेष औजारों का इस्तेमाल किया गया। ये विशिष्ट औजार मुड़ सकते हैं और इसलिए इनके इस्तेमाल में विशेष दक्षता और सावधानी की जरूरत होती है।

इस सर्जरी में एक ही सुराख से तीन औजार शरीर में प्रवेश कराए जाने के कारण उनके आपस में टकराने का डर रहता है। ऐसे में इस सर्जरी को बहुद सधे हुए हाथों और कौशल के साथ अंजाम दिया गया।

गोयल ने बताया, "इस प्रक्रिया से मरीज को तकलीफ तो कम होती ही है साथ ही एक ही सुराख से सर्जरी होने की वजह से निशान भी नहीं दिखाई देंगे। उन्होंने बताया कि मरीज को गुरुवार को अस्पताल से छुट्टी भी मिल जाएगी।"

गोयल का कहना है, "एक सुराख के जरिए गॉल ब्लैडर की सर्जरी कामयाबी से संपन्न होने के बाद अब इस प्रक्रिया को अपेक्षाकृत जटिल शल्यक्रियाओं में भी अपनाए जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। उन्होंने बताया कि अब वह इस सर्जरी का प्रयोग पेट के कैंसर और वजन कम करने से संबद्ध शल्य क्रिया (वेटलॉस सर्जरी) में करेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+