जलवायु परिवर्तन की उभरती चुनौती राजस्थान में गंभीर

सिंह बुधवार को संस्थानिक औद्योगिक क्षेत्र, सीतापुरा में "जलवायु परिवर्तन और उभरती हुई चुनौतियां" विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से आज जो हालात पैदा हो रहे हैं, वह चिंता का विषय है। हम विकास की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके साथ-साथ हमें प्रकृति के संरक्षण के उपाय भी सोचने होंगे, ताकि हमें भविष्य में किसी तरह की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़े।

पंचायती राज मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इस दिशा में "हरित राजस्थान" जैसी योजना शुरू कर अनूठी पहल की है, लेकिन जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्या के समाधान के लिए आमजन को भी आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि आज मानव केवल अपनी सुख सुविधाओं के बारे में ही सोच रहा है, वह प्रकृति को इससे हो रहे खतरे के बारे में नहीं सोच रहा। जनसंख्या वृद्घि से देश में कई समस्याएं बढ़ रही हैं, इसलिए हमें जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रभावी प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि राजस्थान में मानसून की अनिश्चितता के कारण सूखे की स्थितियां बनी हैं, राज्य सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए आपदा प्रबंधन के बेहतर प्रयास किए हैं।

कार्यशाला में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य प्रो. विजय शंकर व्यास ने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्या के निराकरण हेतु विकसित देशों को विकासशील देशों की मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा विकासशील देशों को साधनों में वृद्घि हेतु ऋण उपलब्ध कराए जाते हैं, जो विकास में सहायक होते हैं, लेकिन यह विकास पर्यावरण पर दुष्प्रभाव डाल रहा है। अत: इस पर दूरगामी सोच रखते हुए अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक स्तर पर विभिन्न संगठनों एवं देशों को सहायता प्रदान करनी चाहिए।

भारत में बी.बी.सी के संपादक संजीव श्रीवास्तव ने कार्यशाला में कहा कि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से आने वाली पीढ़ियों को कई संकटों का सामना करना पड़ेगा, इसलिए समय रहते हम सभी को मिलकर पर्यावरण संरक्षण की सार्थक पहल करनी होगी। मीडिया को जलवायु परिवर्तन से संबंधित सामग्री एकत्रित कर एवं शोध करने के बाद इसे वर्तमान संदर्भ में परिभाषित कर आमजन को जागृत करने का कार्य करना चाहिए।

जनसत्ता के संपादक ओम थानवी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं और रेगिस्तान का भी प्रसार हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम विकास की ओर बढ़ रहे हैं, हमारी जीवनशैली में भी परिवर्तन हो रहा है, लेकिन यह विकास की प्रक्रिया मानव जीवन को खतरे में डाल रही है। थानवी कहा कि हमें गांधीजी की हिंद स्वराज की कल्पना को साकार करने के लिए सरकार के साथ-साथ आमजन एवं मीडिया को भी सकारात्मक भूमिका निभानी होगी। हमें विकास का खाका भी खींचना होगा, लेकिन इसके साथ-साथ मीडिया को जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्या के समाधान के लिए जनजागृति लानी होगी, तभी हम सुरक्षित जीवन जी पाएंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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