तीन दिनों में पासपोर्ट देने की परियोजना में फिर विलंब
नई दिल्ली, 16 सितम्बर (आईएएनएस)। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन(संप्रग) सरकार के ई-प्रशासन कार्यक्रम के तहत तीन दिनों में पासपोर्ट जारी करने की एक परियोजना की दूसरी समय सीमा भी अक्टूबर में समाप्त होने जा रही है, लेकिन परियोजना का अभी कुछ अता-पता नहीं है। खास बात यह कि परियोजना अब कब शुरू होगी, इसकी नई समय सीमा निर्धारित नहीं है।
विदेश मंत्रालय (एमईए) की पासपोर्ट सेवा परियोजना पर एक अरब रुपये की लागत निर्धारित है। पासपोर्ट तैयार करने की प्रणाली में सुधार के लिए सरकार द्वारा आईटी, कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसिस (टीसीएस) के साथ किए गए समझौते को एक साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन अभी तक परियोजना को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है।
एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, "यह बहुत ही जटिल परियोजना है। इसके लिए जरूरी है कि सब कुछ दुरुस्त होना चाहिए, क्योंकि परियोजना शुरू हो जाने के बाद बीच में हम किसी भी तरह की गड़बड़ी का मौका नहीं दे सकते।"
जून महीने में समय सीमा समाप्त हो जाने के बाद टीसीएस ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि यह परियोजना बेंगलुरू व चंडीगढ़ में अक्टूबर महीने में शुरू हो जाएगी।
लेकिन विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि परियोजना की लांचिंग स्थगित कर दी गई है और इसके लिए फिलहाल कोई नई तारीख भी तय नहीं की गई है।
समझौते के अनुसार टीसीएस, परियोजना के लिए सॉफ्टवेयर तैयार कर रही है और वह पासपोर्ट सेवा केंद्रों के प्रारंभिक कार्यो का संचालन भी करेगी, लेकिन संवेदनशील सूचना के साथ ही बाद की सभी कार्रवाई सरकार के हाथों में ही रहेगी।
पिछले सप्ताह टीसीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से मीडिया में खबर आई थी कि चूंकि एक आपदा निवारण केंद्र की स्थापना की जा रही है, इस कारण परियोजना में देरी हो रही है। इस आपदा निवारण केंद्र में सभी पासपोर्ट रिकॉर्ड सुरक्षित होंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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