डीएमके मंत्रियों को संसद में तमिल में जवाब देने की नहीं मिली अनुमति
लोकसभा के महासचिव पी. डी. टी. आचारी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "सदन की स्थापित परम्परा के मुताबिक मंत्रियों को सवालों का जवाब हिन्दी या अंग्रेजी में ही देना होता है। सवालों के जवाबों से जुड़ी फाइलें भी हिन्दी और अंग्रेजी में लिखी होती हैं। इसलिए मंत्रियों को अपना जवाब या तो हिन्दी या फिर अंग्रेजी में ही देना होगा।"
उन्होंने कहा कि सांसद चाहें तो अपना सवाल या फिर अपनी बात क्षेत्रीय भाषाओं में रख सकते हैं। संविधान में इसका प्रावधान भी है लेकिन यह प्रावधान मंत्रियों पर लागू नहीं होता है।
केंद्रीय रसायन व उर्वरक मंत्री एम. के. अझागिरी ने मंगलवार को चेन्नई में कहा था कि डीएमके के मंत्रियों व सांसदों ने संसद के अधिकारियों से संसद की कार्यवाही के दौरान तमिल में जवाब दिए जाने की अनुमति मांगी है।
ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) की अध्यक्ष जे. जयललिता ने अझागिरी और अन्य डीएमके सांसदों के इस आग्रह का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मंत्री को यदि हिन्दी और अंग्रेजी की जानकारी नहीं होगी तो वह सदन में मूकदर्शक बना बैठा रहेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications