पोलियो को जड़ से मिटाने के लिए डायरिया से निपटना जरूरी
नई दिल्ली, 16 सितम्बर (आईएएनएस)। सरकार पोलियो को जड़ से मिटाने के लिए काफी प्रयास कर रही है लेकिन इस बीमारी को तब तक खत्म नहीं किया जा सकता जब तक कि डायरिया जैसी घातक बीमारी पर नियंत्रण नहीं पा लिया जाता। अकेले डायरिया से देश में हर साल 500,000 बच्चों की मौत हो जाती है।
देश में कार्यरत स्वयंसेवी संस्था रोटरी इंटरनेशनल के मुताबिक डायरिया पोलियो की बूंदों को बेअसर कर देता है, लिहाजा पोलियो की दवा की बूंदों में असर पैदा करने के लिए पहले डायरिया पर को खत्म करना होगा।
रोटरी इंटरनेशनल ने डायरिया को खत्म करने के लिए भारत सरकार के साथ एक समझौता किया है। उसका मानना है कि डायरिया से पीड़ित बच्चे पर पोलियो की दवा बूंदों का कोई असर नहीं होता क्योंकि वे उसके पेट में टिक ही नहीं पाती हैं।
'इंडिया नेशनल पोलियोपल्स सोसाइटी ऑफ रोटरी इंटरनेशनल' के अध्यक्ष दीपक कपूर ने आईएएनएस को बताया, "देश में डायरिया से हर साल पांच लाख बच्चों की मौत हो जाती है। इसे पोलियो बढ़ाने वाली बीमारी के रूप में देखा जा सकता है।
इसका कारण यह है कि डायरिया से पीड़ित एक बच्चे की पेट में पोलियो की दवा की बूंदें टिक नहीं पातीं। हम यह समझते हैं कि बच्चे को पोलियो की दवा पिला दी गई है लेकिन असल में वह दवा मल के रास्ते उसके पेट से बाहर निकल चुकी होती है।"
कपूर ने कहा कि उनकी संस्था ने इस संबंध में काम करने के लिए सरकार के साथ हाथ मिलाया है। बकौल कपूर, "हम डायरिया को लेकर लोगों को जागरूक करेंगे। हम जिंक टैबलेट और ओरल रिहाड्रेशन थेरेपी (ओआरटी) के प्रयोग और उपयोग पर भी बल देंगे। सरकार इस काम में हमारी पूरी मदद कर रही है।"
डायरिया की रोकथाम के लिए जिंक टैबलेट और ओआरटी का उपयोग बेहद असरकारी माना जाता है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन से मान्यता मिली हुई है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत इसके प्रयोग को बढ़ावा दिया जाता है।
कपूर ने बताया कि डायरिया से सर्वाधिक संख्या में उत्तर प्रदेश, बिहार और उड़ीसा में बच्चों की मौत होती है। साथ ही पोलियो के सर्वाधिक मामले भी इन्हीं राज्यों में पाए गए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल देश भर में पोलियो को 136 मामले पाए गए हैं, जिनमें से सर्वाधिक 97 उत्तर प्रदेश से हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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