रायगढ़ में सेज़ का विरोध

रायगढ़ में सेज़ का विरोध

ज़ुबैर अहमद

बीबीसी संवाददाता, मुंबई

मुंबई से 80 किलोमीटर दूर एक छोटे से शांत वातावरण वाले गाँव दिव में इन दिनों काफ़ी हलचल सी है. विशेष आर्थिक क्षेत्र या स्पेशल इकॉनॉमिक ज़ोन यानी सेज़ का विरोध करने और अपनी ज़मीनों को बिकने से रोकने के उपाए ढूँढ़ने के लिए किसान मंगलवार को वहाँ इकट्ठा हुए.

रायगढ़ ज़िले का यह गाँव उन दर्जनों गाँवों में से एक है जहाँ धान की फ़सल ख़ूब होती है और इसीलिए इस ज़िले को चावल का कटोरा कहते हैं.

यहाँ इकट्ठा हुए किसानों में से एक विश्वास पाटिल इस गाँव के नज़दीक हरे-भरे एक एकड़ खेत का मालिक था, लेकिन वहाँ की 80 प्रतिशत ज़मीन अब उसकी नहीं रही.

उसने 10 लाख रुपयों में उसे रिलायंस कंपनी को बेच दिया जो रायगढ़ में एक विशाल स्पेशल इकॉनॉमिक ज़ोन बनाने की तैयारी कर रही है. मगर अब विश्वास पाटिल को लगता है कि उन्हें ज़मीन की कम क़ीमत मिली. विश्वास का कहना था, "मुझे पैसों की ज़रुरत थी, मैं लालच में आ गया और अपनी ज़मीन केवल दस लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के हाथों बेच दिया. इस समय इस ज़मीन की कीमत दो करोड़ है और मुझे दो करोड़ रुपए मिलने चाहिए." पाटिल के साथी एकनाथ भावे भी कई एकड़ ज़मीन के मालिक हैं लेकिन उनकी ज़मीन विशेष आर्थिक क्षेत्र से बाहर है इसलिए वह बच गए.

एकनाथ भावे बताते हैं कि किसानों ने अपनी ज़मीनें क्यों बेचीं, " किसानों के पास नकद पैसे नहीं होते. शादी-ब्याह में उन्हें पैसों की ज़रुरत होती है इसलिए वह अपनी ज़मीन बेचने पर मजबूर हो जाते हैं. लेकिन बाद में उन्हें समझ में आता है कि उनके साथ धोखा हुआ. रायगढ़ में ऐसे हज़ारों काश्तकार हैं." महाराष्ट्र का शहर रायगढ़ घनी आबादी वाले शहर मुंबई से नज़दीक होते हुए भी काफ़ी सुन्दर है.

इस सरज़मीन पर सरकार ने 11 विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाने की मंज़ूरी दी है. सामाजिक कार्यकर्ता सुरेख दलवी कहती हैं कि यह उद्योगपतियों को ख़ुश करने के लिए किया जा रहा है. सुरेख के अनुसार, "रायगढ़ में पहाड़ भी हैं और समुद्र भी. यहाँ के खेत हरे-भरे हैं. यहाँ किसान अनाज के मामले में किसी पर निर्भर नहीं रहते. लेकिन कुछ उद्योगपतियों को ख़ुश करने के लिए सरकार इस ज़िले के कृषि उत्पादन को और यहाँ के वातावरण को तहस-नहस करने पर तुली है." देश भर में एक हज़ार से अधिक विशेष आर्थिक क्षेत्रों को मंज़ूरी दी जा चुकी है. महाराष्ट्र 202 के साथ इस दौड़ में सबसे आगे है.

प्रीती संपत किसानों के अधिकार के लिए दो साल से लड़ रही हैं. वह कहती हैं कि पूरे देश में किसान ऐसे क्षेत्रों के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे हैं प्रीती कहती हैं कि यह सभा केवल महाराष्ट्र के किसानों की है. इस तरह की सभाएँ पूरे देश में आयोजित की जा रही हैं. और इसके बाद गोवा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अन्य कई राज्यों में इस तरह की सभाएँ होंगी.

तो अब इस सभा ने फ़ैसला किया है कि वह विशेष आर्थिक क्षेत्र को ज़मीन नहीं बेचेंगे और जिन्होंने बेच दी है, उन्हें उचित मुआवज़ा दिलवाया जाएगा.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+