रायपुर में प्रदूषण ने बढ़ाईं श्वसन संबंधी समस्याएं
रायपुर, 15 सितम्बर (आईएएनएस)। रायपुर और उसके बाहरी क्षेत्रों में हजारों लोग इन दिनों श्वसन और त्वचा संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं। इसकी वजह शहर के बाहरी क्षेत्रों में चल रही औद्योगिक इकाईयों से होने वाले प्रदूषण को माना जा रहा है।
प्रदूषण के उच्च स्तर की वजह से रायपुर के आस-पास 20 किलोमीटर के क्षेत्र में लगी करीब 145 इकाईयों को 'लाल श्रेणी' में रखा गया है। विशेषज्ञों, स्थानीय लोगों और राजनेताओं का कहना है कि ये इकाईयां प्रदूषण नियंत्रक उपकरणों का उपयोग नहीं कर रही हैं।
क्षेत्र में हुए औद्योगिक प्रदूषण पर विस्तृत शोध कर चुके विशेषज्ञ के. एस. पटेल का कहना है, "इन इकाईयों ने प्रदूषण नियंत्रक उपकरण नहीं लगाए हैं इसके बाद भी सरकार ने इन्हें चलाने की अनुमति दे रखी है।"
रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ला विश्वविद्यालय के 'स्कूल ऑफ स्टडीज इन कैमिस्ट्री' में प्रोफेसर शुक्ला ने आईएएनएस से कहा, "प्रदूषण नियंत्रक उपकरण नहीं होने की वजह से रायपुर और आसपास बसे करीब 40 गांवों के लगभग 10 लाख लोग श्वसन व त्वचा संबंधी बीमारियों से ग्रस्त हैं।"
शुक्ला के मुताबिक औद्योगिक क्षेत्र की इकाईयों के आसपास की वायु का नमूना लेकर जांच करने पर पता चला है कि यहां वायु में सस्पेंडेड पर्टिकुलेट मैटर (एसपीएस) की मात्रा निर्धारित सीमा से 10 गुना अधिक है।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री रमन सिंह औद्योगिक प्रदूषण मुद्दे के प्रति नरम रुख अपनाने की बात नकारते हैं। सिंह ने कहा, "यह पूर्व कांग्रेस सरकार थी जिसने रायपुर के आस-पास खुल रही स्पंज लौह इकाइयों को इलोक्ट्रोस्टेटिक प्रेसिपिटेटर (ईएसपी) लगाए बिना ही शुरू करने की इजाजत दे दी थी। हमने तय किया है कि क्षेत्र में नई स्पंज लौह इकाईयों को इजाजत नहीं देंगे और चल रही इकाईयों में ईएसपी लगाना आवश्यक होगा।"
धारसिवा विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक देवजी भाई पटेल कहते हैं, "छत्तीसगढ़ सरकार असहाय व्यक्ति की तरह रायपुर के बाहरी क्षेत्रों में करीब 145 इकाईयों को प्रदूषण मानदंडों का उल्लंघन होते देख रही है।"
उन्होंने आईएएनएस से कहा, "मेरे निर्वाचन क्षेत्र में करीब 150,000 लोगों की समय से पहले मृत्यु हो रही है। यदि सरकार इस मुद्दे पर शांत रहती है तो लोग कानून को अपने हाथ में ले लेंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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