गांधी प्रतिष्ठान मसला सरकार में सामंजस्य की कमी का परिणाम : अनुपम मिश्र

नई दिल्ली, 15 सितम्बर (आईएएनएस)। गांधी शांति प्रतिष्ठान (जीपीएफ) को गिराए जाने के हाल के केंद्र सरकार के निर्णय से गांधीवादी काफी आहत हैं। गांधीवादियों का कहना है कि ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान को गिराने की बात कैसे सोची जा सकती है। यह सरकार में सामंजस्य की कमी का परिणाम है।

गांधीवादियों का कहना है कि जिस संस्था की स्थापना जवाहर लाल नेहरू, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सरदार वल्लभभाई पटेल, जाकिर हुसैन, जे.वी. कृपालानी, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी जैसे लोगों ने की हो, उसे कोई सरकार गिराने की बात कैसे सोच सकती है।

गांधी शांति प्रतिष्ठान से जुड़े प्रख्यात गांधीवादी व पर्यावरणविद् अनुपम मिश्र ने आईएएनएस को बताया कि यह मामला काफी पुराना है। आपातकाल के दौरान गांधी शांति प्रतिष्ठान ने लोकतंत्र की हिफाजत में अपने तरीके से प्रमुख भूमिका निभाई थी। जयप्रकाश नारायण की गिरफ्तारी प्रतिष्ठान में ही हुई थी। जनता पार्टी के प्रधानमंत्री के चयन के लिए सांसदों की बैठक भी यहीं हुई थी।

मिश्र ने बताया कि दोबारा सत्ता में आने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान की गतिविधियों की जांच के लिए कुदाल आयोग का गठन किया था। आयोग ने प्रतिष्ठान की भूमि की लीज समाप्त होने तथा उस पर सरकार विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया था।

बाद में सरकार ने कुदाल आयोग को समाप्त कर दिया था और न्यायमूर्ति कुदाल का भी अब निधन हो चुका है, लेकिन वह फाइल उसी तरह पड़ी हुई थी। जिसे अब सर्वोच्च न्यायालय ने बंद की है।

केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने 14 जुलाई, 2009 को राजधानी में दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान को गिराए जाने का नोटिस जारी किया था।

नोटिस में संस्था द्वारा परिसर में अवैध निर्माण की बात की गई थी और उस पर सरकार विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगाया गया था। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने उन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इस मामले को ही खारिज कर दिया। अदालत ने सरकार को नसीहत भी दी कि वह गांधी शांति प्रतिष्ठान जैसी गिनी-चुनी संस्थाओं को बंद करने के बारे में कभी न सोचे।

मिश्र ने सवाल किया कि यदि प्रतिष्ठान सरकार विरोधी गतिविधियों में लिप्त होता तो उसी सरकार का संस्कृति मंत्रालय पिछले वर्ष उसके लिए पांच करोड़ रुपये का अनुदान क्यों जारी करता? उससे जुड़े कई लोगों को सरकार पुरस्कृत क्यों करती? दरअसल, यह सरकार में सामंजस्य व समझदारी की कमी का परिणाम है।

ज्ञात हो कि स्वयं मिश्र को ही केंद्र सरकार की ओर से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पर्यावरण पुरस्कार व वृक्ष मित्र पुरस्कार मिल चुके हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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