नक्सलवाद से निपटने में ज्यादा कामयाबी नहीं मिली : प्रधानमंत्री (लीड-1)
पुलिस प्रमुखों के तीन दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, "नक्सलियों का बढ़ता प्रभाव देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। इस दिशा में हमे अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी है। यह चिंता की बात है कि हमारे प्रयासों के बावजूद नक्सल प्रभावित राज्यों में नक्सली हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।"
उन्होंने कहा, "मैंने पहले भी कहा था और आज फिर कह रहा हूं कि नक्सलवाद से निपटने के लिए हमें रणनीति के तहत काम करना होगा। कानून-व्यवस्था के सामान्य मामलों की तरह हमें इसे नहीं ले सकते। नक्सली आंदोलन को जनजातियों और अति निर्धनों के समूहों का समर्थन प्राप्त है। समाज, बुद्धिजीवियों और युवाओं के एक खास वर्ग पर इनका प्रभाव भी है।"
केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने सोमवार को कहा था कि पिछले साल देश भर में नक्सली हिंसा की 1591 घटनाएं हुई थीं जिनमें 721 लोग मारे गए थे। इस साल अगस्त तक 1405 नक्सली हिंसा की घटनाएं हो चुकी हैं और 580 लोग मारे जा चुके हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में हिंसा की घटनाओं में कमी आई है। 1980 में जब इसकी शुरुआत हुई थी उसके मुकाबले आज वहां हिंसा की घटनाएं कम हुई हैं लेकिन अन्य खतरों ने हमारी चिंताओं को बढ़ा दिया है।
उन्होंने कहा, "नियंत्रण रेखा से नेपाल, बांग्लादेश और समुद्र के रास्ते घुसपैठ के मामलों में वृद्धि हुई है। यह हमारे लिए चिंता की बात है। हाल के दिनों में सैन्यकर्मियों और हथियारों से लैस घुसपैठियों के बीच मुठभेड़ के कई मामले सामने आए हैं।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिति में भी कोई खास सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, "पूर्वोत्तर के दो राज्यों मणिपुर और असम में हाल के दिनों की हिंसक घटनाएं हमे चिंतित करने वाली हैं। पूर्वोत्तर में अपहरण और धमकी की घटनाएं आम बात हो गई है। सुरक्षा प्रबंधन यदि ठीक हो जाए तो यहां की स्थिति में सुधार हो सकता है।"
प्रधानमंत्री ने राज्यों के पुलिस प्रमुखों से अपने-अपने राज्यों में रिक्त पदों को भरने का आह्वान करते हुए आतंकवाद के नए स्वरूप से लड़ने के लिए नए जमाने के पुलिसकर्मियों की आवश्यकता पर बल दिया।
आतंकवाद के नए स्वरूप से निपटने के लिए तकनीक के इस्तेमाल और नई खोजों का जिक्र किया। चिदम्बरम ने भी सोमवार को अपने संबोधन में इसका जिक्र किया था।
उन्होंने कहा, "हमें नए जमाने के पुलिसकर्मियों की जरूरत है जो पेशेवर, कुशल, प्रशिक्षित तथा लक्ष्य से प्रेरित हों और साथ ही तकनीक, जांच और संबंधित अन्य कामों में दक्षता रखते हों। हमारा जोर क्षमता निर्माण पर है ताकि पुलिस व पुलिस थाने सभी आवश्यक उपकरणों व जरूरतों से सुसज्जित हो।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "सभी पुलिस थानों को आत्मनिर्भर होना पड़ेगा। उन्हें दंगों और अन्य घटनाओं से निपटने के लिए बेहतर संसाधनों, हथियारों और बेहतर आंकड़ा प्रबंधन तंत्रों से सुसज्जित होने की जरूरत है। हर शहर में आधुनिक पुलिस नियंत्रण कक्ष होना चाहिए।"
पुलिस सेवा में कर्मचारियों की कमी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जमीनी स्तर पर पुलिस सेवा को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, "हमें पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ानी है। अभी एक लाख व्यक्ति पर महज 145 पुलिसकर्मी है। इस अनुपात को बढ़ाने की आवश्यकता है। इस दिशा में पहला कदम पुलिसकर्मियों की नियुक्ति होगा।"
प्रधानमंत्री ने पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने सभी पुलिस प्रमुखों से कहा कि वे बदलते जमाने के साथ पुलिस सेवा में बदलाव लाए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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