मानव मूत्र से बढ़ सकती है टमाटर की पैदावार
फिनलैंड के कोपियो विश्वविद्यालय के पर्यावरणीय जीवविज्ञानी शोधार्थी सुरेंद्र प्रधान और उनके साथियों ने टमाटर के पौधों को लवण-उर्वरक, मूत्र और लकड़ी के अवशेष या सिर्फ मूत्र का पोषण दिया।
उर्वरक के रूप में मूत्र का पोषण पाने वाले टमाटर के पौधे में लगे टमाटरों में लवण-उर्वरक का पोषण पाने वाले पौधे में लगे टमाटरों की तुलना में अधिक नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम पाया गया। मूत्र के पोषण से विकसित टमाटर में अधिक प्रोटीन भी मिला और यह मनुष्य के उपभोग के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है।
प्रधान ने कहा," यह एक साधारण तकनीक है। टायलेट से या अलग केन में मूत्र को इकठ्ठा किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, "अगर लकड़ियों के अवशेष उपलब्ध हैं तो इनका उपयोग फास्फोरस, पोटेशियम व अन्य पोषक पदार्थ के पूरक के रूप में किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि यह तरीका महंगे उवर्रकों का बेहतर विकल्प है। महंगे उर्वरक दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में आसानी से उपलब्ध नहीं होते।
नेपाली मूल के सुरेंद्र प्रधान ने बताया कि इस शोध पर आधारित एक पायलेट प्रोजेक्ट नेपाल में नवंबर में शुरू किया जाएगा।
लेकिन स्वीडन स्थित स्टॉकहोम इनवायर्नमेंट इंस्टीट्यूट के पारिस्थतिकी-कृषि एवं आरोग्य तकनीक विशेषज्ञ हाकन जॉनसन ने कहा," एक परिवार या व्यक्ति से एकत्र किए गए मूत्र की मात्रा बेहद कम है।"
जॉनसन ने कहा,"यह तकनीक छोटे किसानों की मदद कर सकती है लेकिन बड़े और सीमांत किसानों के लिए यह पर्याप्त नहीं है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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