पाकिस्तानी आतंकी गुट भारत के खिलाफ सक्रिय : चिदंबरम (लीड-1)

राज्य पुलिस प्रमुखों के तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए चिदंबरम ने कहा, "मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुआ हमला पूरे परिदृश्य को बदलने वाला था। हम बेपरवाह होकर ज्यादा लंबे समय तक काम नहीं कर सकते। देश में पुलिस का काम हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। मुंबई हमले के बाद यह चुनौती और गंभीर हो गई है।"

पांच दिनों की अमेरिका यात्रा से लौटे चिदंबरम ने यहां उस बात को दोहराया, जो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक महीना पहले आंतरिक सुरक्षा पर आयोजित एक सम्मेलन में कही थी। उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद अभी भी एक गंभीर चिंता का विषय है।

चिदंबरम ने कहा कि आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, "आतंकवाद को हम जरा भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम किसी भी आतंकी खतरे या आतंकी हमले के मुकाबले के लिए अपनी तैयारी के स्तर को बढ़ाएंगे और खतरे या हमले की स्थिति में हमारी प्रतिक्रिया तत्काल व निर्णायक होगी।"

चिदंबरम ने कहा, "एलईटी व जेईएम जैसे आतंकी संगठन आतंकी हमलों की फिराक में लगे हुए हैं। वे आतंकवाद के नए-नए तरीकों व साधनों को लगातार अमल में ला रहे हैं।"

चिदंबरम ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मनमाने तबादलों पर राज्यों के पुलिस प्रमुखों पर बरसते हुए कहा कि बहुत से पुलिस अधिकारियों को फुटबाल बना दिया गया है और उन्हें इधर से उधर स्थानांतरित किया जाता रहता है।

चिदंबरम ने कहा, "यह बहुत खेद का विषय है कि अधिकांश पुलिस अधिकारियों को फुटबाल बना दिया गया है और काम या अधिकारियों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव का ध्यान रखे बिना उनका तबादला इस पद से उस पद पर किया जाता है।"

चिदंबरम ने सुरक्षा मामलों पर बेपरवाह रवैये, पुलिस में भर्ती की गैर पारदर्शी प्रक्रिया और पुलिस अधिकारियों के जल्दी-जल्दी तबादलों के लिए राज्य सरकारों की भी आलोचना की।

चिदंबरम ने पुलिस प्रमुखों से कहा कि वे अपने दिल को टटोलें और फिर इन प्रश्नों का जवाब दें कि जिला पुलिस प्रमुखों व थाना प्रभारियों के औसत कार्यकाल की अवधि कितनी है।

गृहमंत्री ने पुलिस प्रमुखों से यह भी पूछा कि राज्य सरकारों द्वारा किए जाने वाले मनमाने तबादलों पर वे चुप क्यों रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों की भर्ती प्रक्रिया में सुधार, इसे समयबद्ध करने और पारदर्शी बनाने में रूचि नहीं हैं।

चिदंबरम ने कहा कि न सिर्फ पुलिस प्रमुख होने के नाते अपने मातहतों की ओर से बोलना उनका कर्तव्य है वरन उस जनता की ओर से भी बोलना उनका कर्तव्य है, जिसकी सुरक्षा का उत्तरदायित्व उन पर है।

उन्होंने कोष की कमी के मुद्दे की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। राज्यों से पुलिस को पर्याप्त कोष उपलब्ध कराने का आग्रह करते हुए चिदंबरम ने कहा कि अन्य योजनाओं के लिए धन आवंटित करने के बाद ही पुलिस के लिए कोष स्वीकृत किया जाता है।

गृह मंत्री ने कहा कि संविधान से मिली जिम्मेदारी के तहत राज्यों को पुलिस को पर्याप्त कोष उपलब्ध कराना चाहिए। वास्तव में सुरक्षा राज्य के खजाने की प्राथमिकता होनी चाहिए। बहरहाल यह पाया गया है कि अधिकांश राज्य ठीक इसके उल्टा रास्ता अपनाते हैं और अन्य मदों में धन आवंटित करने के बाद केवल बची हुई रकम ही पुलिस को उपलब्ध कराते हैं।

देश में बढ़ती नक्सली हिंसा की घटनाओं की ओर संकेत करते हुए चिदंबरम ने कहा कि नक्सलवादी अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए पूर्वोत्तर के आतंकवादियों से संबंध स्थापित कर रहे हैं।

चिदंबरम ने कहा कि नक्सली अपना प्रभाव क्षेत्र बढ़ाने के लिए पूर्वोत्तर के अलगाववादियों और आतंकवादियों से गठबंधन करना चाहते हैं..वे उनकी अलगाववादी मांग का समर्थन भी कर रहे हैं।

नक्सलवादियों की बढ़ती हिंसा के साथ ही ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए उनके हमलों में हो रहा अत्याधुनिक तरीकों का इस्तेमाल भी चिंता का कारण है।

चिदंबरम ने कहा कि नक्सलवादी पुलिसकर्मियों, पुलिस के मुखबिरों और सुरक्षा बलों पर हमला करने के साथ ही सड़कों और पुलों जैसे आधारभूत ढांचों को भी निशाना बना रहे हैं।

गृह मंत्री ने कहा कि आगामी पांच वर्षो में एक आधुनिक पुलिस कानून, बड़े शहरों में पुलिस व्यवस्था, फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण और जेल सुधारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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