अवसाद से बाहर निकल संगीत में कायम किए नए रिकॉर्ड
बृज खंडेलवाल
आगरा, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। अपने भाई की 1982 में हुई मृत्यु से व्यथित दिनेश शांडिल्य इस हादसे के बाद गहरे अवसाद में चले गए थे। उन्होंने आत्महत्या की भी कोशिश की थी।
फिर इन्हीं अंधकारमय दिनों में उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की भूमि पर बांसुरी का संगीत खोजा। आज उनके नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हैं और वह शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
उत्तरप्रदेश विद्युत निगम के सेवानिवृत्त इंजीनियर शांडिल्य ने विश्व की सबसे छोटी (3 इंच) और सबसे बड़ी (5.6 फीट) बांसुरी बनाने का रिकॉर्ड बनाया है।
शांडिल्य कहते हैं, "लिम्का और गिनीज रिकॉर्ड बुक में नाम दर्ज होने के बाद मेरी निगाह बांसुरी की लंबाई 10 फीट तक बढ़ाने पर केंद्रित थी और अंतत: मैंने ऐसा ही किया। मैंने दिल्ली में सुब्रतो पार्क स्थित एयर फोर्स स्टेडियम में कुछ सीमित श्रोताओं के बीच इस बांसुरी को बजाया था।"
आज शांडिल्य शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं तो यह केवल संगीत की वजह से है। कुछ साल पहले वह एक टूटे हुए व्यक्ति थे।
अपने युवा भाई की मौत के बाद अत्यधिक अवसाद से ग्रस्त शांडिल्य ने ट्रक के सामने कूदकर अपनी जान देने की कोशिश की थी।
शांडिल्य कहते हैं, "कोई भी दवा या चिकित्सा मुझे अवसाद से बाहर नहीं ला पा रही थी। मैंने ट्रक के सामने कूदकर जान देने की कोशिश की लेकिन मैं बच गया। इसके बाद मैं मानसिक आरोग्यशाला में रहा, मुझे बिजली के झटके भी दिए गए।"
"अंतत: मुझे वृंदावन में सांत्वना मिली, जहां मैंने राधा-कृष्ण की सेवा में बांसुरी पर काम करने की प्रेरणा पाई। 1993 में मेरी पत्नी और मां की भी मृत्यु हो गई। अवसाद के उन दिनों में मैंने संगीत का रुख किया। फिर मेरे दिमाग में अलग-अलग आकार की बांसुरी बनाने का विचार आया। मैंने तीन फुट की बांसुरी से शुरूआत की, फिर चार फीट और अंत में पांच फीट की बांसुरी बनाई।"
शांडिल्य ने आईएएनएस से कहा, "मेरे लिए यह एक आध्यात्मिक यात्रा है। मैं केवल राधा-कृष्ण के लिए बांसुरी बजाता हूं और इससे मुझे अत्यधिक संतुष्टि मिलती है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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