पुलिस अधिकारियों के मनमाने तबादलों से चिदंबरम चिंतित

राज्यों के पुलिस प्रमुखों के तीन दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा, "यह बहुत खेद का विषय है कि अधिकांश पुलिस अधिकारियों को फुटबाल बना दिया गया है और काम या अधिकारियों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव का ध्यान रखे बिना उनका तबादला इस पद से उस पद पर किया जाता है।"

सुरक्षा मामलों पर बेपरवाह रवैये, पुलिस में भर्ती की गैर पारदर्शी प्रक्रिया और पुलिस अधिकारियों के अस्थाई तबादले के कारण राज्य सरकारों की भी चिदंबरम ने आलोचना की।

चिदंबरम ने पुलिस प्रमुखों से कहा कि वे अपने दिल को टटोलें और फिर इन प्रश्नों का जवाब दें कि जिला पुलिस प्रमुखों व थाना प्रभारियों के औसत कार्यकाल की अवधि कितनी हैं?

गृहमंत्री ने पुलिस प्रमुखों से यह भी पूछा कि राज्य सरकारों द्वारा किए जाने वाले मनमाने तबादलों पर वे चुप क्यों रह जाते हैं?

उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें भर्ती प्रक्रिया में सुधार, इसे समयबद्ध करने और पारदर्शी बनाने की अनिच्छुक हैं।

चिदंबरम ने कहा कि न सिर्फ पुलिस प्रमुख होने के नाते अपने अधिकारियों की ओर से बोलना उनका कर्तव्य है वरन उस जनता की ओर से भी बोलना उनका कर्तव्य है जिनकी सुरक्षा का उत्तरदायित्व उन पर है।

उन्होंने कोष की कमी के मुद्दे की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। राज्यों से पुलिस को पर्याप्त कोष उपलब्ध कराने का आग्रह करते हुए चिदंबरम ने कहा कि अन्य योजनाओं के लिए धन आवंटित करने के बाद ही पुलिस के लिए कोष स्वीकृत किया जाता है।

गृह मंत्री ने कहा कि संविधान से मिली जिम्मेदारी के तहत राज्यों को पुलिस को पर्याप्त कोष उपलब्ध कराना चाहिए। वास्तव में सुरक्षा राज्य के खजाने की प्राथमिकता होनी चाहिए। बहरहाल यह पाया गया है कि अधिकांश राज्य ठीक इसके उल्टा रास्ता अपनाते हैं और अन्य मदों में धन आवंटित करने के बाद केवल बची हुई रकम ही पुलिस को उपलब्ध कराते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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