साहित्यिक पत्रिका 'कथादेश' ऑनलाइन हुई
इस अवसर पर शर्मा ने कहा कि इंटरनेट के जरिए हिन्दी भाषा का प्रचार प्रसार तेजी से संभव है, और साहित्यिक पत्रिका कथादेश का ऑनलाइन होना एक सार्थक पहल है। उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषा को राजभाषा बनाने के लिए गंभीर कोशिशें नहीं हुई हैं, लेकिन हिन्दी का धीरे धीरे प्रसार हो रहा है और आम लागों को हिन्दी के प्रति संकल्प लेने की आवश्यकता है।
हिन्दी लोक डॉट कॉम और पोर्टल पर कथादेश की शुरुआत के बाबत इसके संचालक पुनीत पांडे ने कहा कि इंटरनेट पर हिन्दी के प्रचार के लिए बहुत कोशिशें हो रही हैं और हिन्दीलोक डॉट कॉम उन्हीं में से एक है। पुनीत ने कहा कि क थादेश के जरिए देश-दुनिया के लोग निशुल्क इस साहित्यिक पत्रिका का आनंद ले सकेंगे। और जल्दी ही वह साइट पर रंगमंच, फिल्म आदि से जुड़ी गंभीर सामग्री पाएंगे।
इस अवसर पर हिन्दी नेस्ट की संपादक मनीषा कुलश्रेष्ठ ने कहा कि हिन्दी में स्तरीय साहित्य का अभाव है और कथादेश इस कमी को पूरा कर सकती है। उन्होंने कहा, इंटरनेट पर तमाम तकनीकी दिक्कतों के बावजूद अब हिन्दी दयनीय नहीं है, लेकिन हिन्दी के विद्वानों और सुधि लोगों को अब तकनीक को लेकर जागरूक होना होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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