निर्वासित कश्मीरी पंडित दिल्ली में मुंडन कराएंगे
करीब 20 वर्ष पहले जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा कश्मीरी पंडितों की हत्या शुरू किए जाने के कारण घाटी से बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित पलायन को मजबूर हो गए थे।
दिल्ली में निर्वासित जीवन बिता रहे कश्मीरी पंडित कमल हक ने आईएएनएस को बताया कि 14 सितम्बर 1989 को आतंकवादियों ने श्रीनगर में एक कश्मीरी पंडित की हत्या की। इसके बाद वहां से कश्मीरी पंडितों के पलायन का सिलसिला आरंभ हुआ।
उन्होंने बताया, "अपना सिर मुंडवा कर हम इस त्रासदी का विरोध करेंगे।"
अपनी पत्नी के साथ वर्ष 1990 में कश्मीर घाटी से पलायन करने वाले हक ने बताया कि करीब 24 लोग इस मौके पर सिर मुंडवाएंगे और विरोध प्रदर्शित करने के लिए सैकड़ों लोग यमुना के किनारे एकत्र होंगे।
उन्होंने बताया कि दिल्ली और उसके उपनगरों में करीब 80,000 निर्वासित कश्मीरी पंडित रहते हैं और सभी ने इस कार्यक्रम के लिए एकजुटता प्रकट की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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