भ्रष्ट अधिकारियों पर मुकदमा के लिए मंजूरी की आवश्यकता न हो : मोइली
मोइली ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून में कई सारे बदलावों का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा, "कानून में व्याप्त खामियां सामाजिक ताने-बाने को तथा आर्थिक व राजनीतिक प्रक्रियाओं में नागरिकों की व्यापक भागीदारी को छिन्न-भिन्न कर रही हैं।"
विज्ञान भवन में आयोजित फाइटिंग 'क्राइम्स रिलेटेड टू करप्शन (भ्रष्टाचार से संबंधित अपराधों से संघर्ष)' विषय पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में अपने समापन संबोधन में मोइली ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को भी झकझोरा कि भ्रष्ट अधिकारियों में अधिक भय पैदा करने के लिए वह भ्रष्टाचार के मामलों में सजा देने की दर में वृद्धि लाए।
मोइली द्वारा भ्रष्टाचार निरोधी कानून में बदलाव के जो प्रस्ताव किए गए हैं, उनमें मुखबिरों की वैधानिक हिफाजत और पीड़ित की हिफाजत के लिए एक प्रावधान शामिल है।
भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्तियों को जब्त किए जाने संबंधी प्रधान न्यायाधीश के विचारों का समर्थन करते हुए मोइली ने कहा, "लॉ कमीशन द्वारा सुझाए गए, भ्रष्ट सरकारी कर्मचारी संपत्ति जब्ती विधेयक को बिना कोई देरी किए लागू किया जाना चाहिए।"
मोइली ने कहा, "रंगे हाथों पकड़े गए या आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति खड़ी कर चुके किसी भी सरकारी कर्मचारी के ऊपर मुकदमा चलाने के लिए किसी पूर्व मंजूरी की कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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