आंतरिक सुरक्षा पर पुलिस महानिरीक्षकों का सम्मेलन 14 सितम्बर से
सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री डॉ़ मनमोहन सिह सम्मेलन को संबोधित करेंगे। वे सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक भी प्रदान करेंगे।
इस वर्ष सम्मेलन में आंतरिक सुरक्षा के समक्ष मौजूद खतरों पर प्रमुख रूप से विचार विमर्श होने की संभावना है। वामपंथी उग्रवाद, आतंकवाद, तटीय सुरक्षा, पूर्वोत्तर में विद्रोह और देश में नकली मुद्रा के चलन पर विचार-विमर्श होने की संभावना है।
सम्मेलन के एजेंडे में राष्ट्रीय पुलिस मिशन, औद्योगिक धोखाधड़ी, अगले वर्ष राष्ट्रमंडल खेलों के लिए सुरक्षा इंतजाम जैसे महत्वपूर्ण नीतिगत मसलों पर प्रस्तुतियां भी शामिल हैं।
सम्मेलन का उद्देश्य देश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सुरक्षा प्रशासकों को राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी विविध मसलों पर मुक्त रूप से विचार-विमर्श करने का मंच उपलब्ध कराना है। यह सम्मेलन देश में पुलिस के समक्ष विविध प्रचालनात्मक, ढांचागत और कल्याण संबंधी समस्याओं पर बहस के लिए मंच उपलब्ध कराता है। इसमें अपराध नियंत्रण एवं कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियों से निपटने पेशेवर तकनीक और प्रक्रियाओं को तैयार करने तथा उनके आदान-प्रदान पर विचार विमर्श किया जाएगा।
यह सम्मेलन श्रमशक्ति, प्रशिक्षण, संभार तंत्र और उन्नत प्रौद्योगिकी के मामले में पुलिस की क्षमता बढ़ाने के बारे में नए विचारों के आदान-प्रदान के अवसर भी उपलब्ध कराता है।
देश में गुप्तचर ब्यूरो ने पुलिस महानिरीक्षकों का पहला सम्मेलन 1920 में आयोजित किया था। तब से आजादी के बाद के युग में यह सम्मेलन नियमित रूप से आयोजित किया जाता है। स्वतंत्रता के बाद पहला सम्मेलन 1950 में आयोजित किया गया था। प्रारंभ में यह द्विवार्षिक रूप से होता था लेकिन 1973 से इसे हर साल आयोजित किया जाने लगा।
देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा स्थापित परम्परा के अनुसार देश के गृहमंत्री ही सम्मेलन का उद्घाटन करते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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