कमला सुरैया का निजी सामान साहित्य अकादमी को सौंपा

यह सामान उनके पुत्र एम. डी नलपत ने अकादमी के अध्यक्ष एम. मुकुंदन को सौंपा।

नलपत ने कहा, "इसमें वह सब कुछ शामिल है जिसका वह उपयोग करती थीं और कुछ तो बेहद पुरानी यादगार चीजें हैं।"

31 मई को पुणे के एक निजी अस्पताल में सुरैया की मृत्यु हो गई थी और उनके शव को दो दिन बाद तिरुवनंतपुरम की पलायम जुमा मस्जिद में दफनाया गया। वह 75 वर्ष की थीं।

नलपत ने कहा, "अकादमी को दिए गए सामान में चार लेखन मेजें और चौकियां, चार पेन, डाइनिंग टेबल, कुर्सियां और वह सब कुछ शामिल है जो सुरैया उपयोग करती थीं।"

मुकुंदन कहते हैं कि सभी चीजें संरक्षित होंगी और त्रिशूर में जनता के देखने के लिए खुली रहेंगी।

वी. एम. नायर और बालमणि अम्मा के यहां 31 मार्च 1934 को जन्मी कमला ने अपने बचपन का ज्यादातर समय कोलकाता में बिताया। उनके पिता यहां काम करते थे।

अपनी कवयित्री मां और प्रसिद्ध लेखक चाचा नलपत नारायण मेनन से प्रभावित कमला ने 17 वर्ष की आयु में ही माधवीकुट्टी नाम से लिखना शुरू कर दिया था।

उन्होंने अपने से उम्र में 15 साल बड़े माधव दास से विवाह किया था। दोनों के तीन पुत्र हैं।

कमला को पहली साहित्यिक सफलता 42 साल की उम्र में तब मिली जब उनकी आत्मकथा 'माय स्टोरी' प्रकाशित हुई। 1999 में उन्होंने घोषणा की कि वह इस्लाम ग्रहण कर रही हैं और उन्होंने अपना नाम बदलकर कमला सुरैया रख लिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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