जेट प्रबंधन और पायलटों की सुलह वार्ता शुक्रवार को (राउंडअप)
श्रम मंत्रालय के मुख्यालय श्रम शक्ति भवन में श्रम आयुक्त से मुलाकात के बाद जेट एयरवेज के कार्यकारी निदेशक सरोज दत्ता ने संवाददाताओं को बताया, "मुख्य श्रम आयुक्त के साथ सुलह वार्ता कल आरंभ होगी।"
दत्ता ने कहा कि यह बैठक गुरुवार को ही होने वाली थी लेकिन पायलटों के प्रतिनिधियों के वार्ता के लिए नहीं पहुंचने से उसे स्थगित कर दिया गया।
जेट प्रबंधन जोर दे रहा है कि मंगलवार से बीमारी के कारण अवकाश पर गए 600 पायलटों को चिकित्सा प्रमाण पत्र पेश करना चाहिए। दूसरी ओर पायलटों का कहना है कि जब तक बर्खास्त किए गए उनके दो सहयोगियों को बहाल नहीं किया जाएगा वे काम पर नहीं लौटेंगे।
वहीं कामकाज नहीं रोकने के बंबई उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने के लिए पायलटों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना याचिका दाखिल कर दी गई है।
जेट के प्रवक्ता के मुताबिक बंबई उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ ने नेशनल एविएटर्स गिल्ड (एनएजी) के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। इस पर सोमवार को सुनवाई होगी।
एक अन्य घटनाक्रम में जेट एयरवेज के अध्यक्ष नरेश गोयल ने गुरुवार को नई दिल्ली में श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की।
बैठक के बाद खड़गे ने संवाददाताओं से कहा, "यदि आवश्यकता हुई तो उनका मंत्रालय हस्तक्षेप करेगा।"
इस मसले को सुलझाने के लिए बुधवार देर रात पायलटों और प्रबंधन की वार्ता विफल हो जाने की वजह से गतिरोध बरकरार है।
हड़ताल की वजह से अब तक देश भर में करीब 450 उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं जिनकी वजह से पिछले दो दिनों में 28,000 से ज्यादा यात्रियों को असुविधा उठानी पड़ी है।
गुरुवार को 136 घरेलू और 31 अंतर्राष्ट्रीय उड़ाने रद्द करनी पड़ीं। सरकार इस सिलसिले में अनिवार्य सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) भी लगाने पर भी विचार कर सकती है।
नेशनल एविएटर्स गिल्ड के अध्यक्ष गिरीश कौशिक ने आईएएनएस से कहा, "हम और हमारे साथी अपने संवैधानिक अधिकार के लिए लड़ रहे हैं। हम इस पूरे मामले से काफी दुखी हैं। कोई हमारा सहयोग नहीं कर रहा है।"
उन्होंने कहा, "मुझे डर है कि वे हमें टाडा के तहत बंद न कर दें।"
नई दिल्ली में एयरलाइन के कर्मचारियों ने पायलटों से आंदोलन वापस लेने और उनके (कर्मचारियों) भविष्य को खतरे में न डालने की अपील की।
दिल्ली में जेट एयरवेज के एक कर्मचारी अश्वनी ने कहा, "हम पायलटों से आंदोलन वापस लेने की अपील करते हैं। हमारी एयरलाइन घाटे में चल रही है और अब पायलटों के विरोध के कारण हमारा राजस्व अन्य एयरलाइनों के पास जा रहा है। हमें वेतन कैसे मिलेगा।"
कर्मचारी ने कहा कि हालांकि पायलटों की समस्याओं के साथ उनका भावनात्मक लगाव है लेकिन विवाद के समाधान का रास्ता हमेशा बना रहता है।
एक अन्य महिला कर्मचारी जगजीत कौर ने कहा, "हम पहले से ही मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। वेतन में देरी होगी। एयरलाइन पहले से घाटे में चल रही है। पायलट हमारे भविष्य को खतरे में नहीं डाल सकते।"
उन्होंने कहा, "केवल 600 पायलटों की वजह से 13 हजार कर्मचारियों को पीड़ित नहीं किया जाना चाहिए। हम संकट की इस घड़ी में कंपनी के चेयरमैन नरेश गोयल के साथ हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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