शैक्षणिक योजनाओं के लिए शिवराज ने केंद्र से मांगी और धनराशि
चौहान ने कहा, "इस विधेयक के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूंजी और आवर्ती व्यय की आवश्यकता पड़ेगी, जिससे कि स्कूलों के भवनों का निर्माण, शिक्षकों की नियुक्ति और अन्य जरूरतों को पूरा किया जा सके।"
राज्य शिक्षा विभाग के एक अनुमान के मुताबिक इसके तहत अगले तीन वर्षो में लगभग 9000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि खर्च होगी।
चौहान ने अपने पत्र में यह जिक्र भी किया है कि अधिकांश केंद्रीय योजनाओं की शुरुआत में राज्यों को पहले कम हिस्सा खर्च करना पड़ता था लेकिन पिछले कुछ समय से 50 फीसदी खर्च राज्यों के मत्थे मढ़ दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि राज्यों पर 10 फीसदी से अधिक का भार नहीं डाला जाना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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