नए आईआईएम में पुराने संस्थानों की सीमित भूमिका होगी
नई दिल्ली, 9 सितम्बर (आईएएनएस)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) की तर्ज पर वर्तमान भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) का नए बनने वाले आईआईएम को तराशने में अधिक भूमिका नहीं होगी, क्योंकि उनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय में उच्च शिक्षा सचिव आर.पी. अग्रवाल ने आईएएनएस से कहा, "नए संस्थानों को संवारने में पुराने संस्थानों की सीमित भूमिका होगी।"
अग्रवाल ने कहा, "आईआईटी के विपरीत वर्तमान आईआईएम की इस काम में अधिक भूमिका नहीं होगी। नए आईआईएम की देखरेख के लिए उनके पास पर्याप्त संसाधन भी नहीं हैं।"
पिछले महीने केंद्र सरकार ने वर्तमान सात आईआईएम के अतिरिक्त सात नए आईआईएम की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इनमें से चार संस्थानों में वर्ष 2010-11 शैक्षणिक सत्र से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी, जबकि बाकी तीन संस्थान उसके एक साल बाद शुरू हो जाएंगे।
अग्रवाल ने कहा कि सीमित सहयोग के रूप में त्रिची (तमिलनाडु) में स्थापित संस्थान की देखभाल आईआईएम-बेंगलुरू करेगा, रायपुर (छत्तीसगढ़) की देखभाल आईआईएम-इंदौर, रांची (झारखंड) की देखभाल आईआईएम कोलकाता और रोहतक (हरियाणा) की देखभाल आईआईएम-लखनऊ के जिम्मे होगा।
अग्रवाल ने कहा, "मैं स्पष्ट कर दूं कि आईआईटी आपस में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, लेकिन आईआईएम के साथ ऐसा नहीं है। वे ज्यादा स्वायत्तशासी इकाई के रूप में काम कर रहे हैं। उनमें से प्रत्येक संस्थान एक स्वतंत्र संस्थान है। उनकी अपनी सीमाएं भी है लेकिन हां, उन्हें कोई एक भूमिका जरूर निभानी होगी।"
अग्रवाल ने आगे कहा, "वे पाठ्यक्रम तैयार करने में मदद करेंगे और अपने प्राध्यापकों को भी भेजेंगे। मैं नहीं समझता कि नए आईआईएम पुराने आईआईएम के परिसरों में शुरू होंगे। नए आईआईएम की अपनी नई ईमारतें होंगी।"
अग्रवाल ने कहा कि पुराने आईआईटी ने नए संस्थानों को पूरी तरह अपनाया है। उदाहरण के तौर पर आईआईटी पंजाब ने आईआईटी दिल्ली के परिसर से अपना कामकाज शुरू कर दिया था। इस संस्थान के पंजाब में एक वैकल्पिक परिसर में जाने के पहले एक वर्ष तक इसके छात्र भी आईआईटी दिल्ली के छात्रावासों में रहे थे।
अग्रवाल ने हालांकि कहा है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय मानता है कि नए आईआईएम की स्थापना और उनकी कार्यप्रणाली एक सहज प्रक्रिया होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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