इशरत को आतंकी ही मानती है गुजरात सरकार (लीड-1)
अहमदाबाद के महानगरीय दंडाधिकारी एस. पी. तमांग की रिपोर्ट आने के एक दिन बाद राज्य सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री जयनारायण व्यास ने पत्रकारों से कहा, "जांच रिपोर्ट कानूनसम्मत नहीं है, इसलिए राज्य सरकार इसे चुनौती देगी।"
सरकार ने यह भी कहा है कि मारे गए चारों व्यक्ति लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के कार्यकर्ता थे। उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या तथा देश में कई आतंकी हमलों की योजना तैयार की थी।
उन्होंने कहा कि जांच में दंड प्रक्रिया संहिता की जो धाराएं लगाई गई हैं वह तर्कसंगत नहीं हैं।
व्यास ने कहा कि वह इस बात को लेकर चकित हैं कि जब गुजरात उच्च न्यायालय ने 13 अगस्त 2009 को इस मामले की एक उच्च स्तरीय पुलिस जांच का आदेश दे दिया था, जिसके लिए 30 नवंबर तक की समय सीमा निर्धारित की गई थी, फिर कोई महानगरीय दंडाधिकारी इस मामले की जांच कैसे कर सकता है।
व्यास ने कहा है, "दंडाधिकारी तमांग की रिपोर्ट गैर कानूनी है और एक हद तक अपनी सीमा का अतिक्रमण है क्योंकि उच्च न्यायालय द्वारा पहले ही इस मामले में एक उच्चस्तरीय जांच का आदेश दिया जा चुका था। समझदारी की बात तो यह थी कि उन्हें जांच को आगे बढ़ाना ही नहीं चाहिए था।"
उल्लेखनीय है कि अहमदाबाद पुलिस की अपराध शाखा (अनुसंधान) ने शहर के बाहरी क्षेत्र में 15 जून 2004 को एक कथित मुठभेड़ में गोली मारकर इशरत और उसके तीन दोस्तों जावेद गुलाम उर्फ प्रनेश कुमार पिल्लई, अमजद अली उर्फ राजकुमार अकबर अली राणा और जीशान जौहर अब्दुल गनी को मार गिराया था।
पुलिस ने दावा किया था कि ये चारों लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे और उनका इरादा मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने का था।
महानगरीय दंडाधिकारी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस के साथ इन चारों की मुठभेड़ नहीं हुई थी। वकील मुकुल सिन्हा द्वारा मीडिया में जारी रिपोर्ट के मुताबिक 12 जून 2004 को इन चारों का मुंबई से अपहरण करने के दो दिन बाद उनकी हत्या कर दी गई थी।
कानून मंत्री एम. वीरप्पा मोइली ने भी गुजरात पुलिस के हाथों कथित मुठभेड़ में मारी गई मुंबई की छात्रा इशरत जहां के मामले को 'अमानवीय' बताया है।
मोइली ने आईएएनएस से कहा, "यह अमानवीय है, अगर ठीक तरीके से जांच की जाए तो कई और मामले सामने आएंगे।"
उन्होंने कहा कि वह चकित हैं कि देश में इस तरह की घटनाएं घट रही हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार सभी दोषी अधिकारियों को दंडित किया जाना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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