गांवों में बैंकिंग सुविधाओं के लिए रिजर्व बैंक का मिशन
पित्रा (त्रिपुरा), 8 सितम्बर (आईएएनएस)। राजधानी अगरतला के नजदीक ही एक गांव में रहने वाली गृहणी राधारानी सूत्रधार एकबैंक में अपना खाता खोलना चाहती है, लेकिन उसके गांव में या गांव के आसपास कोई बैंक नहीं है। वहीं उसकी ग्रामीण साथी हीरा चौधरी को एक बैंक ने ऋण देने से मना कर दिया।
देश के केंद्रीय बैंक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) का कहना है कि सब कुछ बदल रहा है। आरबीआई जल्द ही गांवों में बैंकिंग सुविधाएं मुहैया कराने के लिए व्यापार संवाददाता की नियुक्ति करेगा।
रिजर्व बैंक की उप गर्वनर उषा थोराट ने यह जानकारी देते हुए कहा कि ये बैंकों के लिए ये व्यापार संवाददाता एनजीओ, स्वयं सहायता समूह, सहकारी, वित्तीय संस्थाएं, सेवानिवृत्त शिक्षक और सरकारी कर्मचारियों में से चुने जाएंगे।
थोराट ने कहा कि आरबीआई ने गांवों में बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
थोराट ने दक्षिणी त्रिपुरा के सूत्रधार, चौधरी और सैकड़ों ग्रामीणों के लिए कहा, "चिंता करने की कोई बात नहीं है, बैंक आपके पास आएगा, बैंक आपको ऋण के अलावा बैंकिग सुविधाएं भी मुहैया कराएगा।"
चौधरी ने एक साल पहले मुर्गी पालन फार्म खोलने के लिए उदयपुर जिले के एक बैंक में 50,000 रुपये के ऋण के लिए प्रयास किया था लेकिन बैंक ने ऋण देने से यह कहकर मना कर दिया कि उनके पास कोई गारंटर नहीं है।
थोराट ने इस पर कहा, "बैंक को 50,000 तक ऋण लेने वाले व्यक्ति से गारंटर के लिए नहीं कहना चाहिए।"
अगरतला से 70 किलोमीटर दूर पहाणी क्षेत्र के एक गांव में सभा के दौरान थोराट ने कहा, "पूरे देश में 565,000 गांवों में बैकिंग नेटवर्क स्थापित करना संभव नहीं है लेकिन आरबीआई प्रत्येक जगहों पर बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाना चाहता है"
बैंकिंग सेवाओं में सुधार के बारे में उन्होंने कहा कि आरबीआई ने देश के ज्यादा गांवों तक बैंकिंग सुविधा पहुंचाने का फैसला लिया है।
थोराट ने सात पूर्वोत्तर राज्यों में बुनियादी ढांचे और औद्योगिक क्षेत्रों में विकास की कमी का भी उल्लेख किया। इन क्षेत्रों में पैसा नहीं पहुंच पाने की मुख्य वजह सड़कें, यातायात सुविधाओं का विकास नहीं होना है। इसके लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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