इशरत मामले की जांच रिपोर्ट को चुनौती देगी गुजरात सरकार
अहमदाबाद के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट एस. पी. तमांग की रिपोर्ट आने के एक दिन बाद राज्य सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री जयनारायण व्यास ने पत्रकारों से कहा कि "जांच रिपोर्ट कानूनसम्मत नहीं है और इसलिए राज्य सरकार इसे चुनौती देगी।"
उन्होंने कहा कि जांच में इस मामले में जो दंड प्रक्रिया संहिता की जो धाराएं लगाई गई हैं वह तर्कसंगत नहीं हैं।
व्यास अचंभित हैं कि मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कैसे मामले की जांच को आगे बढ़ा सकते हैं जबकि 13 अगस्त 2009 को गुजरात उच्च न्यायालय ने इसके लिए एक उच्च स्तरीय पुलिस जांच का आदेश दे दिया था। जिसके लिए 30 नवंबर तक का समय निर्धारित किया गया था।
उल्लेखनीय है कि अहमदाबाद पुलिस की अपराध शाखा (अनुसंधान) ने शहर के बाहरी क्षेत्र में 15 जून 2004 को एक कथित मुठभेड़ में इशरत और उसके तीन दोस्तों जावेद गुलाम उर्फ प्रनेश कुमार पिल्लई, अमजद अली उर्फ राजकुमार अकबर अली राणा और जीशान जौहर अब्दुल गनी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
पुलिस ने दावा किया था कि ये चारों आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे और उनका इरादा मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने का था।
मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट के मुताबिक इन चारों लोगों और पुलिस के बीच मुठभेड़ नहीं हुई थी। वकील मुकुल सिन्हा द्वारा मीडिया में जारी रिपोर्ट के मुताबिक 12 जून 2004 को इन चारों का मुंबई से अपहरण करने के दो दिन बाद उनकी हत्या कर दी गई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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