गुजरात पुलिस के दोषी अधिकारियोंके खिलाफ कार्रवाई की मांग

अहमदाबाद की अदालत ने सोमवार को जून 2004 में 19 वर्षीया कॉलेज छात्रा इशरत जहां और उसके तीन दोस्तों की मौत मामले में फैसला देते हुए उसे 'फर्जी मुठभेड़' करार दिया। फैसले के एक दिन बाद मंगलवार को इशरत के परिवार वालों ने दोषी पुलिस वालों को कड़ी सजा दिए जाने की मांग की।

इशरत की बहन नुसरत का कहना कि उनका परिवार जानता था कि यह एक षड्यंत्र था। 22 वर्षीय नुसरत कहती है, "वह उतनी ही देशभक्त और देश से प्यार करने वाली थी जितने कि आप या हम हैं। हम खुश हैं कि अंतत: हमारे परिवार पर लगा धब्बा मिट गया और वह निर्दोष साबित हो गई।"

ठाणे जिले के उपनगर मुंबरा में रहने वाली इशरत मुंबई के गुरुनानक खालसा कॉलेज की बीएससी की छात्रा थी। उसकी मौत से दो साल पहले 2002 में उसके पिता की मृत्यु हुई थी। मां और छह भाई-बहनों सहित आठ सदस्यों के परिवार को चलाने में मदद के लिए वह कढ़ाई करती थी और ट्यूशन पढ़ाती थी।

अहमदाबाद पुलिस की अपराध शाखा (अनुसंधान) ने शहर के बाहरी क्षेत्र में 15 जून 2004 को एक कथित मुठभेड़ में इशरत और उसके तीन दोस्तों जावेद गुलाम उर्फ प्रनेश कुमार पिल्लई, अमजद अली उर्फ राजकुमार अकबर अली राणा और जीशान जौहर अब्दुल गनी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

पुलिस ने दावा किया था कि ये चारों आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे और उनका इरादा मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने का था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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