रेड्डी के हेलीकॉप्टर की उड़ान योग्यता पर लीपापोती कर रहा डीजीसीए
विष्णु माखीजानी
नई दिल्ली, 8 सितम्बर (आईएएनएस)। अपनी वेबसाइट पर विरोधीभासी जानकारियां देने के बाद भारतीय नागरिक उड्डयन नियामक अब पिछले सप्ताह दुर्घटनाग्रस्त हुए उस हेलीकॉप्टर की उड़ान योग्यता पर लीपापोती के काम में जुट गया है, जिसमें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी की मौत हुई।
मंगलवार को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार बेल-430 हेलीकॉप्टर जिसकी पहचान का चिन्ह वीटी-एपीजी था को पांच दिसम्बर 2006 से पांच दिसम्बर 2010 तक की उड़ान योग्यता का प्रमाणपत्र दिया गया था।
बहरहाल हेलीकॉप्टर दुर्घटना के एक दिन बाद तीन सितम्बर को वेबसाइट पर कहा गया था कि उसे पांच जुलाई 2006 से चार जुलाई 2007 तक की अवधि का प्रमाणपत्र दिया गया था।
यही नहीं ताजा जानकारी में कहा गया है कि प्रमाणपत्र 14 जनवरी 1999 को जारी किया गया जबकि तीन सितम्बर की जानकारी के अनुसार इसे छह जुलाई 2006 को जारी किया गया था।
दो सितम्बर को हेलीकॉप्टर के आधिकारिक तौर पर गायब होने वाले दिन डीजीसीए ने एक बयान जारी कर कहा था, "हेलीकॉप्टर के पास उड़ान योग्यता का वैध प्रमाणपत्र था। प्रमाणपत्र की संख्या 2390 थी और इसकी समय सीमा 05.12.2010 तक थी। हेलीकॉप्टर नए से अब तक 2,812.20 घंटे और प्रमाणपत्र मिलने के बाद से 325.10 घंटे उड़ान भर चुका था। "
यह सूचना डीजीसीए की ताजा जानकारी से मेल खाती है लेकिन तीन सितम्बर की सामग्री से असंगत है।
नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने तीन सितम्बर को कहा था कि डीजीसीए की वेबसाइट पर जो कुछ भी कहा जाए, हेलीकॉप्टर उड़ान भरने के योग्य था।
यहां यह संकेत करना उचित होगा कि उड़ान योग्यता का प्रमाण एक वर्ष के लिए और कुछ स्थितियों में दो वर्ष के लिए दिया जाता है लेकिन किसी भी हालत में चार वर्ष का उड़ान योग्यता प्रमाणपत्र नहीं दिया जाता जैसा कि डीजीसीए ने अपनी वेबसाइट पर ताजा जानकारी दी है।
इस अंतर पर डीजीसीए ने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। ए.के.चोपड़ा संयुक्त महानिदेशक (जांच) ने आईएएनएस से कहा कि वह मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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