विकास तभी जब वंचितों को मिलेगा सामाजिक न्याय : प्रधानमंत्री (लीड-2)
प्रधानमंत्री ने यह स्वीकार भी किया कि समाज के एक बहुत बड़े वर्ग की अब तक अनदेखी होती आई है जिसकी वजह से वह विकास की मुख्यधारा से वंचित रह गया। इस वंचित वर्ग के समेकित विकास के लिए प्रधानमंत्री ने सोमवार को देश के अनुसूचित जाति बहुल 1000 गांवों में 'प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना' (पीएमएजीवाई) नामक योजना शुरू करने की घोषणा की।
राज्यों के सामाजिक न्याय व कल्याण मंत्रियों के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "विकास तब तक नहीं हो सकता जब तक कि समाज के शोषितों और वंचितों को सशक्त नहीं किया जाएगा। उन्हें सशक्त करना हमारी संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। मुझे उम्मीद है कि इन वंचितों व शोषितों की सुरक्षा और उनका सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर उचित कदम उठाएंगी।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "इस साल हम पीएमएजीवाई नामक एक नई योजना आरंभ करने का प्रस्ताव करते हैं। इसके तहत 1000 ऐसे गांवों का चयन किया जाएगा जिनकी 50 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति की हो। यदि यह योजना सफल होती है तो हम इसका विस्तार करेंगे।"
उन्होंने कहा, "इस योजना का उद्देश्य विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का इन गांवों में क्रियान्वयन करना होगा। इसके लिए बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए प्रत्येक गांव को शुरू में 10 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि दी जाएगी।"
उन्होंने कहा कि अब तक इस वंचित वर्ग के प्रति न तो पर्याप्त संवेदनशीलता दिखाई गई और ही उन्हें समझने का प्रयास किया गया। उन्होंने देश केवंचित वर्ग को विकास की प्रक्रिया में बराबर का भागीदार बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, "दुर्भाग्यवश यह नहीं कहा जा सकता कि इन वंचितों की समस्याओं को सुलझाने की दिशा में पर्याप्त संवेदनशीलता दिखाई गई या फिर उन्हें समझा गया।"
उन्होंने कहा, "हमने विकास किया है लेकिन यह विकास उम्मीदों के मुताबिक नहीं हुआ है। वंचित समूहों को विकास की प्रक्रिया में भागीदार बनाया जाना चाहिए।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "वंचितों को समाज की मुख्यधारा से बाहर रहने की इस समस्या की जड़ सामाजिक पूर्वाग्रहों और संबंधित भेदभावों में निहित है।"
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, शारीरिक रूप से अक्षम और वरिष्ठ नागरिकों की शारीरिक सुरक्षा को प्राथमिकता दिए जाने का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर चिंता जताई कि ऐसे लोगों के खिलाफ होने वाली ज्यादतियों से संबंधित मुकदमों में से 30 फीसदी से भी कम को सजा हो पाती है।
उन्होंने कहा, "ऐसे मामलों को प्राथमिकता देनी होगी। इस सिलसिले में मैंने सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र भी लिखा है। राज्यों सरकारों को इस विषय पर गंभीरता से ध्यान देना होगा।"
उन्होंने कहा कि इस वर्ष देश के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इससे सबसे अधिक प्रभावित समाज का कमजोर तबका हुआ है। इसलिए इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी आवश्यक है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इन वंचितों को विकास का लाभ मिल रहा है या नहीं।
प्रधानमंत्री ने कहा, "हाल के दिनों में शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के कुछ समूहों व प्रतिनिधियों से मेरी मुलाकात हुई। मैंने पाया कि ये सभी समाज के प्रति अपने योगदान को लेकर बेहद गंभीर है। हमें उन्हें समान अवसर देना होगा। विशेष जरूरतों के साथ उन्हें बराबर का मौका मिलना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications