अरब के 70,000 स्नातक हर वर्ष करते हैं विदेशों का रुख
समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएम के मुताबिक 22 सदस्यीय अरब लीग के जनसंख्या एवं प्रवासन योजना विभाग द्वारा कराए गए एक अध्ययन के अनुसार रोजगार के लिए विदेशों का रुख करने वाले स्नातकों की वजह से युवाओं के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में पर्याप्त निवेश करने वाले अरब देशों को सालाना 15 करोड़ डॉलर का नुकसान होता है। जबकि जिन देशों में ये युवा जाते हैं, वह देश शिक्षा के क्षेत्र में कुछ भी खर्च किए बिना उनकी योग्यता का दोहन करते हैं।
अध्ययन के मुताबिक वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में अरब जगत के योग्यता-निर्यात करने वाले देशों को प्रतिभा पलायन की प्रवृत्ति रोकने के लिए योजनाएं बनाने की जरूरत है।
अरब राष्ट्रों को विदेशों में रोजगार के लिए जाने वाले स्नातकों को रोकने के लिए अपने ही देश में उनके काम को पुरस्कृत करने और निवेश की संभावनाएं पैदा करने की आवश्यकता है।
अरब लीग, आईएलओ, यूनेस्को और अन्य अरब व अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक लेबनान, सीरिया, ईराक, जार्डन, मिश्र, ट्यूनिस, मोरक्को और अल्जीरिया से हर साल 100,000 वैज्ञानिक, चिकित्सक और इंजीनियर विदेश चले जाते हैं।
विदेश जाने वाले 70 प्रतिशत वैज्ञानिक घर नहीं लौटते जबकि करीब 50 प्रतिशत चिकित्सक, 23 प्रतिशत इंजीनियर और 15 प्रतिशत वैज्ञानिक यूरोप, अमेरिका और कनाडा का रुख करते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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