जलवायु परिवर्तन सशस्त्र बलों का नया दुश्मन
नई दिल्ली, 6 सितम्बर (आईएएनएस)। जलायु परिवर्तन ने युद्ध के मैदान में बदलाव का खतरा उत्पन्न कर दिया है और जमीन पर, समुद्र व वायु में सेना की क्षमता को प्रभावित किया है। यह सब कुछ भारतीय सशस्त्र बलों के लिए नए दुश्मन की तरह है।
सशस्त्र बल इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इस मुद्दे की गंभीरता को सरकार ने अभी संज्ञान में नहीं लिया है।
सशस्त्र बल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, "जहां ग्लोबल वार्मिग रसद को प्रभावित करेगा और हथियारों की टूट-फूट मामलों को बढ़ाएगा, वहीं इसका बल केंद्रित प्रभाव भी होगा। सरकार को इसके कारणों और प्रभाव के अध्ययन में सशस्त्र बलों को शामिल करना चाहिए।"
हिमालय और तिब्बत की पहाड़ियों पर बड़े पैमाने पर सेना की उपस्थिति है। ये स्थल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के सर्वाधिक संभावित इलाकों में से हैं। इस क्षेत्र में हिमनदों का तेजी के साथ पिघलना सियाचिन हिमनद के प्रबंधन में लगी भारतीय सेना के लिए नई तैनाती योजना का आह्वान करेगा।
भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, "सियाचिन हिमनद के असैन्यीकरण का मामला चूंकि सवाल से परे है, इसलिए इसके पिघलने की तीव्र रफ्तार एक नई तैनाती योजना की मांग करेगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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