भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए 71 नई त्वरित अदालतों को मंजूरी

नई दिल्ली, 6 सितम्बर (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के मुताबिक सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए 71 नई त्वरित अदालतों की मंजूरी दे दी है। जल्द ही विभिन्न राज्यों में इनकी शुरूआत होगी।

पिछले महीने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सीबीआई निदेशक अश्विनी कुमार से किए गए सार्वजनिक आग्रह के बाद यह निर्णय लिया गया है। कुमार ने सीबीआई की एक सभा में कहा था कि हमारी 'कमजोर न्यायिक व्यवस्था' भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई में एक रुकावट है।

सीबीआई के एक प्रवक्ता हर्ष बहल ने आईएएनएस से कहा, "सीबीआई भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने को हमेशा तैयार रहती है। लेकिन प्रधानमंत्री के भावपूर्ण भाषण (जो हमारी बैठक के दौरान दिया गया था) ने हमें वास्तव में प्रोत्साहित किया है।"

बहल कहते हैं कि न्यायिक प्रक्रिया को तीव्र करने के लिए सरकार ने 71 नई त्वरित अदालतों के गठन की मंजूरी दे दी है। विभिन्न राज्यों में इनका गठन होगा।

बहल ने कहा कि सीबीआई अभियोजन प्रकोष्ठ में खाली पदों को भरने के लिए जल्द ही कदम उठाएगा।

सीबीआई के द्वैवार्षिक सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी थी कि भ्रष्टाचार देश की जनता को गंभीर रूप से चोट पहुंचा रहा है।

बर्लिन स्थित एक निगरानी संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने भ्रष्टाचार के सूचकांक के मामले में 180 देशों में भारत को 85वें नंबर पर रखा है।

सीबीआई के पास केवल 5,000 एजेंट हैं। इसने वर्ष 2008 में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ 752 मामला दर्ज किया। अदालतों में करीब 9,000 मामलों की सुनवाई लंबित है। इस वर्ष जून तक सीबीआई ने 823 सरकारी अधिकारियों के खिलाफ 565 मामले दर्ज किए हैं।

गांधीवादी एस.डी. शर्मा कहते हैं, "भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। यह एक युद्ध है जिसे हमें जीतना है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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