लघु वित्त योजनाओं से सशक्त बनेगा पूर्वोत्तर
यहां आयोजित रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के सेमिनार को संबोधित करते हुए चौधरी ने कहा, "एसएचजी आंदोलन पूर्वोत्तर में आय का आकर्षक विकल्प बन सकता है। लेकिन इसके लिए बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थानों से पर्याप्त सहयोग अपेक्षित होगा।"
अपने 75वीं वर्षगांठ समारोह के तहत आरबीआई वित्तीय समावेशन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए देश भर में सेमिनारों, जागरूकता अभियानों और वित्तीय सहायता शिविरों का आयोजन कर रहा है।
अगरतला कार्यक्रम आरबीआई की इसी पहल का हिस्सा है।
चौधरी ने आरबीआई को प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों में लघु उधार और ऋण पर जारे देते हुए कहा, "राष्ट्रीयकृत बैंकों से पूर्वोत्तर क्षेत्र की ओर ऋण का एक उचित प्रवाह होना चाहिए।"
चौधरी का कहना है कि 2001 में शिलांग में आयोजित एक मीटिंग में निर्णय लिया गया था कि अगले तीन वर्षो में पूर्वोत्तर क्षेत्र के वर्तमान ऋण-जमा (सीडी) अनुपात के 30 प्रतिशत के औसत को में 58 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत तक पहुंचा दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, "जबकि राष्ट्रीय स्तर पर सीडी अनुपात 66 प्रतिशत हो गया है और पूर्वोतर में घटकर 29 प्रतिशत पर पहुंच गया है।"
इंडो-एशियन न्यूज एजेंसी।


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