विधि शिक्षा में ज्ञान को बढ़ावा देने की जरूरत : बालाकृष्णन
बालाकृष्णन शनिवार को जोधपुर में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के तृतीय वार्षिक दीक्षान्त समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अन्तर विषयों में राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, अर्थ शास्त्र, इतिहास, दर्शन शास्त्र एवं साहित्य के ज्ञान अर्जन से विधि शिक्षा को और अधिक सुदृढ आधार दिया जा सकता है।
उन्होंने संचार क्रांति एवं बढ़ती प्रौद्योगिकी पर चर्चा करते हुए कहा कि आज के इंटरनेट युग में विधि विद्यार्थियों की पहुंच बहुत वृहद स्तर तक हो सकती है। इसके जरिये वे देश-विदेश के न्यायालयों व यूनिवर्सिटी के निर्णय व लेख आदि तक अपनी पहुंच बना सकते हैं। ऐसे माहौल में विधि से जुड़े शिक्षक व विद्यार्थी को इसका अधिकतम उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने ऐसी स्कॉलरशिप देने को भी कहा जिससे वर्तमान में विधि प्रणाली की समस्या को सक्रियता से सामने लाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह स्कालरशिप इतने उच्च स्तर की हो जिसमें न्यायविद, प्रशासक व विधि निर्माता इसमें लगातार क्रियाशील रहें।
उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की शिक्षा का मुख्य उद्देश्य जो होता है उसमें वैयक्तिक उपलब्धि व सुदृढ आधार के साथ ही सामाजिक योगदान भी होता है। विधि शिक्षा में यह बात बहुत मायने रखती है जहां किसी तरह के मतभेदों को दूर करने के लिए विधि शिक्षा का सहारा लिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि न्याय क्षेत्र ऐसा है जहां विधि एवं न्याय से जुड़े लोग समाज के निचले तबके के अधिकारों की रक्षा करते हैं। इसे देखते हुए आज के विधि विद्यार्थियों को इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इसे दूसरी तरफ सुदृढ आधार देने के लिए कॉमर्शियल लॉ कम्पनीज में अच्छा स्तर पाने के बाद उन्हें न्यायिक क्षेत्र व विधिक शिक्षा में भी अपना करियर बनाना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications