18 वर्षों के बाद निर्दलीय बना डूसू का अध्यक्ष (लीड-2)

नई दिल्ली, 5 सितम्बर (आईएएनएस)। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में 18 वर्षो के बाद अध्यक्ष पद पर एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) को एक-एक सीट मिली है। शीर्ष पद के लिए एबीवीपी और एनएसयूआई के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहरा दिया गया था।

डूसू के लिए हुए चुनाव में मनोज चौधरी अध्यक्ष चुने गए हैं। वह बौद्ध अध्ययन विभाग के छात्र हैं। उन्होंने ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (आइसा) के बजिंदर सिंह को 11 मतों से हराया। चौधरी को 5,391 वोट मिले जबकि बजिंदर सिंह को 5,380 मत मिले।

समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए यह पहला अवसर रहा है, जब उसके उम्मीदवार ने चार शीर्ष सीटों में से एक सीट, संयुक्त सचिव पद पर जीत दर्ज कराई है।

विश्वविद्यालय के मुख्य पीठासीन अधिकारी जे. एम. खुराना ने आईएएनएस से कहा, "इस तरह का परिणाम सही मायने में एक लंबे समय बाद आया है।"

इससे पहले 1991 में राजीव गोस्वामी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में डूसू के अध्यक्ष बने थे। उन्होंने 1990 में पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने के विरोध में आत्मदाह की कोशिश की थी।

उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी की कृति वढ़ेरा और सचिव पद पर एनएसयूआई की अर्शदीप कौर ने जीत दर्ज की। वढ़ेरा मिरांडा हाउस की और कौर विधि संकाय की छात्रा हैं।

हंसराज कॉलेज की छात्रा और सपा की छात्र शाखा, समाजवादी छात्र सभा की उम्मीदवार अनुप्रिया त्यागी संयुक्त सचिव पद के लिए चुनी गई हैं। डूसू के लिए शुक्रवार को वोट डाले गए थे। वोटों की गिनती उत्तरी दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में शनिवार सुबह शुरू हुई थी।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार वढ़ेरा ने निर्दलीय उम्मीदवार अनुराग शर्मा को 2,500 वोटों से हराया। कौर ने हंसराज कॉलेज के रवि कौशिक को 4,000 वोटों से हराया। त्यागी ने आइसा के नताशा नेरवाल को 3,000 मतों से पराजित किया।

डुसू के चार पदों के लिए 29 उम्मीदवार मैदान में थे। इस बार चुनाव में कई छात्र नेताओं को उम्मीदवारी के लिए अयोग्य करार दिया गया था। पूर्व चुनाव आयुक्त जे.एम. लिंगदोह की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिशों के उल्लंघन के कारण कुछ छात्र नेताओं को अयोग्य ठहराया गया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उन उम्मीदवारों की याचिकाएं खारिज कर दी थी, जिनमें उन्होंने अपने को अयोग्य ठहराए जाने को चुनौती दी थी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अध्यक्ष पद के लिए एनएसयूआई के दीपक नेगी और एबीवीपी के रोहित चहल, उपाध्यक्ष पद के लिए एनएसयूआई के उमेश तोमर, सचिव पद के लिए एबीवीपी के ललित कुमार और संयुक्त सचिव पद के लिए अशोक खरे की याचिकाएं खारिज कर दी थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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