बीआरआईसी राष्ट्रों की वैश्विक वित्तीय संरचना में अधिकभागीदारी की मांग (लीड-1)

चारों देशों की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है, "संरक्षणवाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक वास्तविक खतरा बना हुआ है। इसके प्रत्यक्ष व परोक्ष दोनों रूपों से बचा जाना चाहिए।"

यह बयान यहां चारों देशों के शीर्ष आर्थिक नीति नियंताओं की एक बैठक के बाद जारी किया गया। भारतीय पक्ष का नेतृत्व वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने किया। मुखर्जी ने जी20 के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की एक बैठक में भी हिस्सा लिया।

बयान में कहा गया है कि वैश्विक वित्तीय व व्यापार व्यवस्थाओं में जारी सुधारों के कारण सीमा पार से होने वाले पूंजी व निवेश के प्रवाह को नहीं रोका जाना चाहिए।

बयान में कहा गया है, "हम मानते हैं कि सरकारों को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की दोहा दौर की बातचीत के त्वरित व सफल निष्कर्षो के लिए इस तरीके से काम करना चाहिए कि वह एक महत्वाकांक्षी, व्यापक और संतुलित परिणाम सुनिश्चित करा सके।"

इसके पहले भारत की ओर से आईएमएफ में निवेश करने का औपचारिक रूप से वादा किया गया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अप्रैल महीने में यहां हुए जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान इसका प्रस्ताव किया था।

बैठक के बाद मुखर्जी ने कहा, "भारत ने अपनी संचित निधि से आईएमएफ द्वारा जारी नोट में 10 अरब डॉलर के निवेश का निश्चय किया है।" भारत का यह कदम 1990 के दशक के शुरुआत की उसकी वैश्विक आर्थिक स्थिति में एक बड़े बदलाव का संकेत है, क्योंकि उन दिनों भारत को आईएमफ से पैसा लेना पड़ता था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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