स्वाइन फ्लू से 3 की मौत, मृतकों की संख्या 118 हुई (लीड-1)

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बयान के अनुसार शनिवार को आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई। जबकि आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि शनिवार को दो महिलाओं की मौत हुई है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के बयान के अनुसार स्वाइन फ्लू की वजह से अब तक सबसे अधिक मौतें महाराष्ट्र (59) में हुई हैं। इसके बाद कर्नाटक (35), गुजरात (10), आंध्र प्रदेश (3), दिल्ली (3), तमिलनाडु (3), उत्तराखंड (1) और छत्तीसगढ़ (1) शामिल हैं।

बयान के अनुसार शनिवार को दिल्ली में सबसे ज्यादा 52 नए मामले सामने आए। इसके बाद महाराष्ट्र में 45, तमिलनाडु में 28, कर्नाटक में 16, आंध्र प्रदेश में 1, केरल में 1, हरियाणा में 5, चंडीगढ़ में 2, पश्चिम बंगाल में 1, उत्तर प्रदेश में 6 मामले सामने आए।

आंध्र प्रदेश में स्वाइन फ्लू की वजह से शनिवार को दो महिलाओं की मौत हो गई। प्रदेश में फ्लू की वजह से मृतकों की संख्या चार हो गई है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि रूपा देवी (38) को सरकारी चेस्ट अस्पताल में एक सप्ताह पहले भर्ती कराया गया था। शनिवार को उसकी मौत हो गई। इससे पहले अन्य दो अस्पतालों में उसका इलाज किया गया था लेकिन उसका बुखार नहीं उतर रहा था। वह हैदराबाद के भोलकपुर क्षेत्र की रहने वाली थी।

कड़पा शहर की रहने वाली लक्ष्मी देवी की एक निजी अस्पताल में मौत हो गई। उसे 25 अगस्त को भर्ती किया गया था।

प्रदेश में यह दूसरी बार है जब एक ही दिन में स्वाइन फ्लू की वजह से दो लोगों की मौत हो गई। इससे पहले मंगलवार को इस बीमारी से दो लोगों की मौत हो गई थी।

हैदराबाद में अब तक स्वाइन फ्लू के 126 मामले आ चुके हैं। देश का पहला स्वाइन फ्लू मामला यहीं पर 16 मई को सामने आया था।

कर्नाटक में मृतकों का नाम सार्वजनिक नहीं होगा :

कर्नाटक में स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू का भय मिटाने के लिए एक नया फार्मूला तैयार किया है, जिसके तहत इस बीमारी से मरने वालों के नाम, उम्र या अस्पताल के बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।

राज्य में अब तक 35 लोगों की मौत स्वाइन फ्लू से हो चुकी है। राज्य के प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) आई.आर.पेरुमल ने आईएएनएस से कहा, "स्वाइन फ्लू के कारण लोगों में भय फैलने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।"

पेरुमल ने कहा, "हम केवल केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं, जिसमें कहा गया है कि स्वाइन फ्लू से मरने वाले लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जाएं।"

पेरुमल ने कहा कि कई बार स्वाइन फ्लू पीड़ित के परिजन पड़ोसियों द्वारा बहिष्कार किए जाने की शिकायत करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग यह समस्या हल करना चाहता है।

पेरुमल ने कहा, "यदि लोगों को यह जानकारी मिल जाती है कि स्वाइन फ्लू के मरीज की मौत किस अस्पताल में हुई है तो लोग उस अस्पताल में ही जाना बंद कर देते हैं। लोग काफी भयभीत हो जाते हैं, हम भय मिटाना चाहते हैं।"

जांच रिपोर्ट 15 दिन बाद भी नहीं पहुंची :

बिहार से स्वाइन फ्लू के एक संदिग्ध मरीज की जांच रिपोर्ट 15 दिन गुजर जाने के बाद भी राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान (एनआईसीडी), नई दिल्ली द्वारा नहीं भेजी गई है। हालांकि स्वाइन फ्लू की जांच अब पटना में ही होगी। सरकार ने पर्व-त्योहारों के मौकों पर स्वाइन फ्लू की जांच के लिए विशेष शिविर लगाने की योजना बनाई है।

पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के डा़ विजय कुमार ने शनिवार को बताया कि 20 अगस्त को पटना के ही एक व्यक्ति का नमूना जांच के लिए एनआईसीडी भेजा गया था परंतु उसकी जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। उन्होंने कहा कि इसके लिए वहां कई बार संपर्क किया गया परंतु जांच की लंबी कतार की बात कह कर रिपोर्ट नहीं भेजी जा रही है।

वह बताते हैं कि जिस व्यक्ति का नमूना भेजा गया था वह अब पूरी तरह स्वस्थ है। उन्होंने बताया कि पिछले माह तक वह रिपोर्ट की जानकारी के लिए यहां आता था परंतु अब उन्होंने भी आना छोड़ दिया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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