मृत्यु तक जारी रही उनकी दोस्ती
वाईएसआर और राव गुलबर्गा चिकित्सा महाविद्यालय में साथ में थे और तब से वाईएसआर की मृत्यु तक उनकी दोस्ती लगातार जारी रही।
बुधवार को जब वाईएसआर का हेलीकॉप्टर गायब हुआ, तब राव ही वह पहले व्यक्ति थे जो सचिवालय स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में सबसे पहले पहुंचे। अगले दिन जब उन्होंने वाईएसआर की मृत्यु की खबर सुनी तो वह सचिवालय के एक सोफे पर गश खाकर गिर पड़े।
कुछ समय बाद उन्होंने अपना साहस बटोरा और वाईएसआर के घर के सदस्यों को सांत्वना देने के लिए उनके शासकीय निवास की ओर चल दिए। वाईएसआर के बेटे वाईएस जगनमोहन रेड्डी के साथ वह अपने मित्र के शव के समीप खड़े रहे।
केवीपी हमेशा अपने मित्र के साथ रहते थे और प्रमुख मुद्दों पर वह उनके सलाहकार के बतौर काम करते थे। 2004 में वाईएसआर के मुख्यमंत्री बनने के बाद से केवीपी सार्वजनिक मामलों में सरकार के मुख्य सलाहकार की भूमिका निभाते थे।
अधिकारियों की नियुक्तियों और स्थानांतरण और यहां तक कि कांग्रेस में नेताओं दिए जाने वाले महत्वपूर्ण पदों के संबंध में वाईएसआर, केवीपी की सलाह पर भरोसा करते थे।
वाईएसआर ने एक बार केवीपी के बारे में कहा था कि "एक के बिना दूसरे की कल्पना करना मुश्किल है। यदि मैं शरीर हूं, तो वह आत्मा हैं।"
वहीं केवीपी का कहना था कि "वाईएसआर सूरज हैं और मैं केवल एक उपग्रह हूं। मेरे इर्द-गिर्द जो रौशनी है, वह तब तक है जब तक वाईएसआर हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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