आगरा शहर ने महान शिक्षकों को याद किया

आगरा, 5 सितम्बर (आईएएनएस)। ताजमहल के इस शहर में गली-गली में खुली ट्यूशन की दुकानों से काफी पहले महान शिक्षक हुआ करते थे, जिन्हें अब भी इस शिक्षक दिवस पर श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया गया।

जी. आई. डेविड द्वारा अंग्रेजी साहित्य के प्रति पैदा किए गए जुनून के लिए सेंट जोंस कॉलेज के छात्र आज भी उन्हें याद करते हैं। उनके पुराने छात्रों का मानना है कि डेविड जिन्हें वे प्यार से 'गुड्डन प्यारे' कहते थे, का अंग्रेजी साहित्य के प्रति लगाव शेक्सपीयर, कीट्स और शैली से भी ज्यादा था।

1842 में शुरू हुए एशिया के सबसे पुराने कान्वेंट स्कूल सेंट पैट्रिक की सिस्टर डोरोथिया मानती हैं कि शिक्षकों का छात्रों पर गहरा असर होता है।

अपने पसंदीदा शिक्षकों को याद करते हुए कई शिक्षक वर्तमान में हो रहे शिक्षा के व्यवसायीकरण का जिक्र करते हैं।

भारतीय सैन्य अधिकारियों की कई पीढ़ियों को पढ़ा चुके और आज भी यही कार्य कर रहे 76 वर्षीय सेवानिवृत विंग कमांडर एच.एस. सिसौदिया कहते हैं कि "आज हमारे पास शिक्षक हैं, गुरु नहीं।"

सिसौदिया कहते हैं कि एक शिक्षक और गुरु में इतना ही अंतर है कि "गुरु के लिए छात्र में नैतिक मूल्यों का निरंतर हो रहा क्षरण चिंता का विषय होता है। वह एक छात्र को नैतिक मूल्यों में होती गिरावट के प्रभाव से बचने के लिए प्रशिक्षित करता है।"

सेंट पीटर्स कॉलेज की वरिष्ठ शिक्षिका मीरा कहती हैं कि "वर्तमान शिक्षा विभिन्न माध्यमों से कौशल हस्तांतरण की तकनीक तक सीमित रह गई है। शिक्षा के मौलिक उद्देश्य कहीं खो गए हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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