अब इंटरनेट पर भी मिलेगी पंडों की जानकारी

मान्यता है कि गया में अश्विन मास के कृष्ण पक्ष (पितृ पक्ष) में पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा यह भी जाता है कि गयापाल पंडों जी के द्वारा पिंडदान या तर्पण करवाने से ही यह धार्मिक अनुष्ठान पूरा होता है।

मगध प्रमंडल के आयुक्त संजीव कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया कि वह गया के पंडों, पितृपक्ष में गया की व्यवस्था, पिंडदान का महत्व सहित पंडों की पूर्ण जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध कराने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए इंटरनेट पर 'डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट पिंडदान डॉट कॉम' नाम से वेबसाइट तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ भी कर दी गई है।

वह बताते हैं कि अभी इसमें 22 गयापाल पंडों की प्रोफाइल उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि उनका प्रयास है कि बड़े और छोटे सभी प्रकार के पंडों की प्रोफाइल इंटरनेट पर उपलब्ध करा दिए जाएं।

उनका मानना है कि इन पंडों के पास कई पूर्वजों की जानकारी है। देश के विभिन्न राज्यों के अलग-अलग पंडे हैं। इन पंडों के पास चले जाने से लोगों को अपने कई पूर्वजों की जानकारी आसानी से मिल जाती है। उनका कहना है कि इतनी जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध होने से लोगों को अपने इस बात की पूरी जानकारी मिल सकेगी कि उनके पूर्वज पहले कहां रहते थे।

उधर, गयापाल पंडा समूह के श्यामलाल गायब ने बताया कि इंटरनेट पर जानकारी होने से लोगों को पंडों से संपर्क करने में अवश्य सहूलियत होगी। उनका मानना है कि लोगों को अपनी परंपरा और पिंडदान की जानकारी भी उपलब्ध होगी जो हिन्दू परंपरा के लिए सही है।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष तीन सितंबर से 18 सितंबर के बीच पितृपक्ष है जिसमें लाखों लोग अपने पूर्वजों के मोक्ष के लिए गया में पिंडदान करने पहुंचने लगे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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