वाईएसआर को लाखों नम आंखों ने दी अंतिम विदाई (राउंडअप)
रेड्डी की पत्नी विजयलक्ष्मी, बेटे जगनमोहन, बेटी शर्मिला और परिवार के अन्य सदस्य अंतिम विदाई के इस क्षण पर फूट-फूट कर रो पड़े। इस विदारक दृश्य को देखकर यहां मौजूद हजारों लोगों की आंखों में भी आंसू छलक पड़े। परिजनों को ढांढस बंधाने पहुंचे कई मंत्री और वरिष्ठ नेता भी अपने आंखों से आंसू नहीं रोक पाए।
वाईएसआर के नाम से मशहूर राजशेखर रेड्डी के अंतिम दर्शन के लिए शुक्रवार को क्या जनता, क्या नेता और क्या अभिनेता, हर कोई उमड़ पड़ा। सभी इस लोकप्रिय नेता की एक झलक पाने को बेताब दिखे।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी और कई केंद्रीय मंत्रियों ने रेड्डी को श्रद्धांजलि दी। नई दिल्ली से हैदराबाद पहुंचे इन नेताओं ने बेगमपेट में मुख्यमंत्री कार्यालय के परिसर में रखे रेड्डी के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी और राहुल ने रेड्डी की पत्नी विजयलक्ष्मी, पुत्र वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी, पुत्री शर्मिला और अन्य परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने शोक संदेश में कहा, "रेड्डी के दुखद और असामयिक निधन से देश ने एक अभूतपूर्व नेता और आंध्र प्रदेश की जनता ने एक आदर्श मुख्यमंत्री को खो दिया है, जो हमेशा गरीबों के कल्याण के लिए तत्पर रहा करता था।"
उन्होंने कहा, "शोक संतप्त परिवार के सदस्यों और आंध्र प्रदेश की जनता के लिए मेरी हार्दिक सहानुभूति है।"
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस मौके पर कहा, "मैं अपने सहयोगी की अंतिम विदाई में शिरकत करने यहां आई हूं। वह एक उत्कृष्ट, दूरदर्शी और प्रगतिशील नेता थे जो हमेशा गरीबों, महिलाओं, बच्चों और किसानों के उत्थान में लगे रहते थे। बतौर मुख्यमंत्री राज्य के विकास की उन्होंने हमेशा कोशिश की।"
उन्होंने कहा, "हमारे लिए यह बहुत बड़ा नुकसान है। उनका योगदान हमेशा याद रहेगा। जिस प्रकार उन्होंने प्रदेश का विकास किया, वह हमेशा हमें प्रेरित करता रहेगा। उनके परिजनों के प्रति मैं संवेदना प्रकट करती हूं।"
राहुंल गांधी ने अपने शोक संदेश में कहा, "वाईएसआर वास्तव में जननेता थे। आंध्र प्रदेश और देश को उनके निधन से बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। मैंने खुद उनसे कई चीजें सीखी हैं। जो गरीबों के जीवन पर अपनी छाप छोड़ना चाहते हैं उनके लिए वाईएसआर एक प्रेरणास्रोत हैं। हम सब के लिए आज का दिन बड़ा दुखद है।"
रेड्डी को श्रद्धांजलि देने वालों में राज्यपाल नारायणदत्त तिवारी, केंद्रीय मंत्री गृह मंत्री पी. चिदंबरम, रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी, सुशील कुमार शिंदे, प्रफुल्ल पटेल, सलमान खुर्शीद, पृथ्वीराज चव्हाण तथा वीरप्पा मोइली भी शामिल थे।
इस बीच हैदराबाद में कार्यवाहक मुख्यमंत्री के. रोसैया की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की एक बैठक में प्रस्ताव पारित कर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से जगनमोहन को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग की गई।
रेड्डी का पार्थिव शरीर दोपहर एक बजे तक हैदराबाद के लालबहादुर शास्त्री स्टेडियम में रखा गया जहां हजारों लोगों ने नम आंखों से उनके अंतिम दर्शन किए।
तिरंगे में लिपटे रेड्डी के पार्थिव शरीर को फूलों से सुसज्जित एक ट्रक पर रखा गया था। ट्रक के पीछे सैकड़ों वाहन चल रहे थे। अपने पिता के पार्थिव शरीर के साथ खड़े रेड्डी के पुत्र जगनमोहन रेड्डी लोगों से अपील कर रहे थे कि वाहन को आगे बढ़ने दें।
सड़क के दोनों ओर खड़े बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाओं ने अपने इस चहेते नेता को नम आंखों से आखिरी विदाई दी। कई लोग ट्रक के पीछे-पीछे भाग रहे थे और जगनमोहन के प्रति संवेदना प्रकट कर रहे थे।
पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान कुछ इस कदर भीड़ उमड़ी कि वहां भगदड़ मच गई। इसमें कई लोग घायल हो गए।
भगदड़ की वजह से तय कार्यक्रम से एक घंटे पहले दोपहर एक बजे ही रेड्डी के पार्थिव शरीर को बेगमपेट हवाई अड्डे ले जाना पड़ा। पहले उनके पार्थिव शरीर को दो बजे तक स्टेडियम में रखा जाना था।
भगदड़ में घायल कई लोगों की हालत गंभीर है। स्थिति काबू से बाहर होते देख रेड्डी के पुत्र वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी ने अधिकारियों से बात की और फिर पार्थिव शरीर को हवाई अड्डे ले जाया गया। इसके बाद रेड्डी का पार्थिव शरीर सेना के हेलीकॉप्टर के जरिए हैदराबाद के बेगमपेट हवाई अड्डे से कड़प्पा जिले के पुलिवेंदुला लाया गया।
उधर, रेड्डी की मौत का सदमा कई लोग बर्दाश्त नहीं कर सके और अपनी जान गवां बैठे तो कुछ ने उनके शोक में आत्महत्या कर अपनी जान दे दी। ऐसे लोगों की संख्या सौ के ऊपर बताई जा रही है।
लोगों के इस रुख को देखते हुए जगनमोहन रेड्डी ने लोगों से संयम बनाए रखने की अपील करनी पड़ी।
विभिन्न टेलीविजन चैनलों के माध्यम से जनता से अपील करते हुए जगनमोहन ने कहा, "मैं इस दुख की घड़ी में आप सभी लोगों से धर्य रखने और साहस का परिचय देने की अपील करता हूं। मेरे पिता सभी के चेहरे पर मुस्कान देखना चाहते थे और आप लोग ये कदम (आत्महत्या) उठाएंगे तो उन्हें तकलीफ होगी।"
उन्होंने कहा, "मैं आप लोगों से निवेदन करता हूं कि आत्महत्या न करें।" उल्लेखनीय है कि कई लोग कड़प्पा से सांसद जगनमोहन को राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में देख रहे हैं।
तेलुगू टेलीविजन चैनलों के अनुसार अब तक रेड्डी के की मौत के सदमे से 122 लोगों अपनी जान दे चुके हैं।
राज्य के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि जब किसी नेता के निधन के सदमे से इतने सारे लोगों ने अपनी जान दी है।
इस लिहाज से रेड्डी ने लोकप्रियता में तेलुगू देशम पार्टी (तेदपा) के दिवंगत नेता एन.टी. रामाराव को भी पीछे छोड़ दिया है। खबरों में कहा गया है कि मरने वालों में ज्यादातर युवा थे।
राज्य के 23 में से 19 जिलों से लोगों की मरने की खबर आई है। रेड्डी की मौत की खबर सुनने के बाद अकेले पश्चिमी गोदावरी जिले में छह लोगों की मौत सदमे से हो गई जबकि चार ने आत्महत्या कर ली।
एक युवक ने मरने से पहले अपने लिखा, "रेड्डी ने लोगों के लिए अपना जीवन समर्पित किया और मैं उनके लिए अपना जीवन समर्पित कर रहा हूं।"
एक कल्याणकारी योजना के तहत मासिक पेंशन पा रहे एक विकलांग दंपति ने अपने चहेते नेता की मौत की खबर सुनते ही गोदावरी नदी में छलांग लगा दी हालांकि इन दोनों को मछुआरों ने बचा लिया।
हैदराबाद में 42 वर्षीय यदगिरी ने टेलीविजन पर रेड्डी की मौत की खबर सुनते ही इस सदमे में अपना दम तोड़ दिया। रेड्डी के एक ऐसे ही 30 वर्षीय प्रशंसक की हृदयगति रूक जाने से मौत हो गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications