आईएमएफ में भारत से भारी वित्तीय योगदान की उम्मीद

लंदन, 4 सितम्बर (आईएएनएस)। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने आज यहां जी-20 के सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों से मुलाकात शुरू कर दी है, वहीं यूरोप के दो प्रमुख देशों ने उम्मीद जताई है कि भारत अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएम) में वित्तीय संसाधन की कमी को दूर करने में मददगार साबित होगा।

आईएमएफ में यूरोपीय संघ का वित्तीय योगदान जी-20 के वित्त मंत्रियों की मौजूदा बैठक का प्रमुख मसला है। बैठक 5 सितंबर तक चलेगी।

इस बैठक में भारत, चीन, ब्राजील और रूस जैसे देश आईएमएफ के संचालन में व्यापक भूमिका निभाने का मौका दिए जाने की मांग उठा सकते हैं। इसमें इन देशों को आईएमएफ की मतदान प्रक्रिया में ज्यादा असरदार भूमिका निभाने देने की मांग भी शामिल होगी।

उल्लेखनीय है अप्रैल में लंदन में जी-20 की बैठक में यह फैसला लिया गया था कि आईएमएफ में विभिन्न देशों की ओर से कुल 500 अरब डालर का योगदान किया जाएगा। उस बैठक में प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह भी मौजूद थे। रकम का इस्तेमाल वित्तीय संकट में फंसे देशों, खासकर गरीब देशों की मदद के लिए किया जाना है।

यूरोप ने आईएमएफ में करीब 100 अरब डालर के योगदान का ऐलान किया था। जर्मनी और फ्रांस इस कोष में यूरोपीय योगदान को बढ़ाकर 175 अरब डालर किए जाने के पक्ष में हैं।

जर्मनी और फ्रांस ने एक संयुक्त बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है, "भारत और सऊदी अरब जैसे अन्य देशों से यह उम्मीद की जा सकती है कि वे कोष में भारी योगदान करेंगे। हम इन देशों से कोष को समृद्ध बनाने के प्रयासों में शामिल होने की उम्मीद करते हैं।"

बयान में यह भी कहा गया है कि यूरोपीय देशों को दूसरे देशों के कदम का इंतजार किए बिना अपने योगदान की घोषणा करनी चाहिए। ब्रिटेन को जर्मनी एवं फ्रांस का संयुक्त प्रस्ताव पसंद नहीं है। उसका मानना है कि उसकी अर्थव्यवस्था अभी संकट से नहीं उबरी है, इसलिए योगदान में इजाफा व्यावहारिक कदम नहीं होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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