वाईएसआर के अंतिम दर्शन को उमड़ा जन सैलाब (लीड-2)

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, महासचिव राहुल गांधी और कई केंद्रीय मंत्रियों ने रेड्डी को श्रद्धांजलि दी। नई दिल्ली से हैदराबाद पहुंचे इन नेताओं ने बेगमपेट में मुख्यमंत्री कार्यालय के परिसर में रखे रेड्डी के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी और राहुल ने रेड्डी की पत्नी विजयलक्ष्मी, पुत्र वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी, पुत्री शर्मिला और अन्य परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की।

रेड्डी को श्रद्धांजलि देने वालों में राज्यपाल नारायणदत्त तिवारी, केंद्रीय मंत्री गृह मंत्री पी. चिदंबरम, रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी, सुशील कुमार शिंदे, प्रफुल्ल पटेल, सलमान खुर्शीद, पृथ्वीराज चव्हाण तथा वीरप्पा मोइली शामिल थे।

रेड्डी का पार्थिव शरीर दोपहर एक बजे तक लालबहादुर शास्त्री स्टेडियम में रखा गया जहां हजारों लोगों ने नम आंखों से उनके अंतिम दर्शन किए। इसके बाद रेड्डी का पार्थिव शरीर सेना के हेलीकॉप्टर के जरिए हैदराबाद के बेगमपेट हवाई अड्डे से कड़प्पा ले जाया गया जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

इससे पहले, हैदराबाद में रेड्डी का पार्थिव शरीर उनके आवास से पांच किलोमीटर दूर लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया जहां अपने दिवंगत नेता को नम आंखों से श्रद्धांजलि देने के लिए लाखों लोग उमड़ पड़े।

तिरंगे में लिपटे रेड्डी के पार्थिव शरीर को फूलों से सुज्जित एक ट्रक पर रखा गया था। ट्रक के पीछे सैकड़ों वाहन चल रहे थे। अपने पिता के पार्थिव शरीर के साथ खड़े रेड्डी के पुत्र जगनमोहन रेड्डी लोगों से अपील कर रहे थे कि वाहन को आगे बढ़ने दें।

सड़क के दोनों ओर खड़े बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाओं ने अपने इस चहेते नेता को नम आंखों से आखिरी विदाई दी। कई लोग ट्रक के पीछे-पीछे भाग रहे थे और जगनमोहन के प्रति संवेदना प्रकट कर रहे थे।

पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान कुछ इस कदर भीड़ उमड़ी कि वहां भगदड़ मच गई। इसमें कई लोग घायल हो गए।

भगदड़ की वजह से तय कार्यक्रम से एक घंटे पहले दोपहर एक बजे ही रेड्डी के पार्थिव शरीर को बेगमपेट हवाई अड्डे ले जाना पड़ा। पहले उनके पार्थिव शरीर को दो बजे तक स्टेडियम में रखा जाना था।

भगदड़ में घायल कई लोगों की हालत गंभीर है। स्थिति काबू से बाहर होते देख रेड्डी के पुत्र वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी ने अधिकारियों से बात की और फिर पार्थिव शरीर को हवाई अड्डे ले जाया गया।

उधर, रेड्डी की मौत की खबर सुनकर सदमा लगने या फिर आत्महत्या करने से राज्य में 67 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद जगनमोहन ने लोगों से संयम बनाए रखने की अपील की।

जगनमोहन ने कहा, "मैं इस दुख की घड़ी में आप सभी लोगों से धर्य रखने और साहस का परिचय देने की अपील करता हूं। मेरे पिता सभी के चेहरे पर मुस्कान देखना चाहते थे और आप लोग ये कदम (आत्महत्या) उठाएंगे तो उनकी आत्मा को तकलीफ होगी।"

उन्होंने कहा, "मैं आप लोगों से निवेदन करता हूं कि आत्महत्या न करें।"

तेलुगू टेलीविजन चैनलों के अनुसार अब तक रेड्डी की मौत के सदमे से 67 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि जब किसी नेता के निधन के सदमे से इतने सारे लोगों ने अपनी जान गंवा दी।

इस लिहाज से रेड्डी ने लोकप्रियता में तेलुगू देशम पार्टी (तेदपा) के दिवंगत नेता एन.टी. रमाराव को भी पीछे छोड़ दिया है। खबरों में कहा गया है कि मरने वालों में ज्यादातर युवा थे।

राज्य के 23 में से 19 जिलों से लोगों के मरने की खबर आई है। रेड्डी की मौत की खबर सुनने के बाद अकेले पश्चिमी गोदावरी जिले में छह लोगों की मौत सदमे और आत्महत्या करने की वजह से हो गई।

एक युवक ने मरने से पहले अपने सुसाइड नोट में लिखा, "रेड्डी ने लोगों के लिए अपना जीवन समर्पित किया और मैं उनके लिए अपना जीवन समर्पित कर रहा हूं।"

एक कल्याणकारी योजना के तहत मासिक पेंशन पा रहे एक विकलांग दंपति ने अपने चहेते नेता की मौत की खबर सुनते ही गोदावरी नदी में छलांग लगा दी हालांकि इन दोनों को मछुआरों ने बचा लिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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